Wednesday, January 20

ई-टेंडर घोटाला:ED की जद में MP के पूर्व मुख्य सचिव एम गोपाल रेड्डी, हैदराबाद के आवास पर छापा

  • भोपाल, हैदराबाद और बेंगलुरु समेत 16 जगहों पर एक साथ कार्रवाई।
  • घोटाले के दौरान जल संसाधन विभाग के एसीएस थे गोपाल रेड्डी।
    मध्य प्रदेश के ई टेंडरिंग घोटाले की जांच में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जद में पूर्व मुख्य सचिव एम गोपाल रेड्डी आ गए हैं। ईडी की एक टीम ने गोपाल रेड्डी के हैदराबाद स्थित आवास पर छापेमारी कर दस्तावेजों की छानबीन की। । रेड्डी के अलावा उन कंपनियों के यहां भी छापे की सूचना है जिन्हें टेंडर में टेम्परिंग कर ठेके दिए गए सबसे ज्यादा जल संसाधन के 7 ठेकों के ई टेंडर में घोटाले होने के आरोप हैं। उस अवधि में इस विभाग के प्रशासनिक प्रमुख (अपर मुख्य सचिव) गोपाल रेड्डी थे। इस मामले में मप्र ईओडब्ल्यू द्वारा अप्रैल 2018 में दर्ज की गई एफआईआर दर्ज की थी। जिसके आधार पर ईडी ने मनी लान्ड्रिंग का प्रकरण दर्ज किया था।
    सूत्रों के मुताबिक 1985 बैच के आईएएस अफसर गोपाल रेड्डी सितंबर 2020 में रिटायर हो गए थे। इससे पहले कमलनाथ सरकार ने उन्हें 5 मार्च 2020 को मुख्य सचिव बनाया था, लेकिन शिवराज सरकार ने सत्ता में लौटते ही उन्हें हटा कर इकबाल सिंह को मुख्य सचिव बना दिया था। गोपाल रेड्डी रिटायर होने के बाद हैदराबाद शिफ्ट हो गए थे। इस छापे के बारे में गोपाल रेड्‌डी का पक्ष जानने के लिए संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका मोबाइल लगातार बंद रहा।
    सूत्रों ने दावा किया है कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की एक टीम ने बुधवार को भोपाल में हैदराबाद की ही आईटी कंपनी ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन के मानसरोवर कॉम्प्लेक्स स्थित दफ्तर पर कार्रवाई की थी, जिसमें कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए थे। जिस आईटी कंपनी पर कार्रवाई हुई है, उसका नाम मध्यप्रदेश के बहुचर्चित ई-टेंडर घोटाले में भी शामिल है। इस मामले में मध्य प्रदेश की आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो ( EOW) ने कंपनी के 3 डायरेक्टर विनय चौधरी, वरुण चतुर्वेदी और सुमित गोलवलकर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इन पर आरोप है कि इन्होंने फर्जी डिजिटल सिग्नेचर तैयार कर अपने कस्टमर कंपनी को मध्यप्रदेश के अधिकारियों की मिलीभगत से ई-टेंडर में बिडिंग कराकर काम दिलाया था। माना जा रहा है कि ईडी की टीम जल्द ही जेल में बंद ऑस्मो आईटी सॉल्यूशन के तीनों डायरेक्टर्स से पूछताछ कर सकती है।
    दरअसल, ईडी को जब्त दस्तावेजों के आधार शंका है कि जो कंपनियां ई टेंडरिंग घोटाले में शामिल थीं,उन्हें कुछ समय बाद बड़े पैमाने पर भुगतान किए गए थे। अब ईडी यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि क्या इन कंपनियों ने इन भुगतान के एवज में कुछ प्रभावशाली लोगों को आर्थिक लाभ पहुंचाया? इसलिए ईडी इन कंपनियों के खातों से भुगतान पाने वाले कई लोगों के बैंक खातों की भी जानकारी जुटा रही है। ईडी इसी सिलसिले में भोपाल, हैदराबाद और बेंगलुरु सहित 16 स्थानों पर छापे मारे हैं।
    क्या है मामला
    मप्र का ई-टेंडरिंग घोटाला अप्रैल 2018 में उस समय सामने आया था जब जल निगम की तीन निविदाओं को खोलते समय कम्प्यूटर ने एक संदेश डिस्प्ले किया। इससे पता चला कि निविदाओं में टेम्परिंग की जा रही है। तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आदेश पर इसकी जांच मप्र के EOW को सौंपी गई थी। प्रारंभिक जांच में पाया गया था कि जीवीपीआर इंजीनियर्स और अन्य कंपनियों ने जल निगम के तीन टेंडरों में बोली की कीमत में 1769 करोड़ का बदलाव कर दिया था। ई टेंडरिंग को लेकर ईओडब्ल्यू ने कई कंपनियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की हुई है।

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