Wednesday, January 20

सिरोंज:खेत जाने के लिए रास्ता नहीं, किसान ने तहसील परिसर में फांसी लगाने की कोशिश की

लोगों ने उतारा, सरकारी वाहन से ले गए जिला अस्पताल

खेत में जाने के लिए रास्ता नहीं मिलने से परेशान 62 वर्षीय किसान मंगलवार को तहसील परिसर में स्थित पेड़ पर फांसी पर लटक गया। किसान की पत्नी को बिलखते देख मौके पर मौजूद लोगों ने उसे फंदे से उतारा । मौके पर पहुंचे नायब तहसीलदार सीके ताम्रकार, तहसीलदार अनीता पटेल ने तुरंत एसडीएम की गाड़ी से किसान को राजीव गांधी स्मृति चिकित्सालय पहुंचा। किसान को लगातार उल्टी हो रही थी। मनीष रावत ने बताया वह खतरे से बाहर है।

जब… तहसीलदार ने सुनवाई न कर फटकार लगाकर भगाया
सिरोंज तहसील के मंडल 5 में स्थित कजरी बरखेड़ा में रहने वाले किसान भज्जू अहिरवार मंगलवार को पत्नी संपत्तबाई और दो पोतों के साथ तहसील कार्यालय में आए थे। गांव में उनका 1.404 हेक्टेयर भूमि का खेत है। जिसके रास्ते के लिए वे दो महीने से तहसील कार्यालय और विदिशा कलेक्टर के यहां चक्कर काट रहे हैं लेकिन प्रशासन उनकी सुनवाई नहीं कर रहा। मंगलवार को भी वे मंडल 5 की अतिरिक्त तहसीलदार अनीता पटेल के पास अपनी गुहार लेकर पहुंचे थे। तहसीलदार ने उनकी सुनवाई नहीं करते हुए फटकार लगा कर भगा दिया।

गनीमत रही पेड़ की ऊंचाई ज्यादा नहीं थी
परेशान भज्जू, पत्नी के साथ तहसील परिसर में ही बाउंड्रीवाल के सामने लगे बरगद के पेड़ के पास पहुंचा और रस्सी से फंदा डाल कर झूल गया। शुक्र ये रहा कि पेड़ की ऊंचाई अधिक नहीं होने की वजह से उसके घुटने जमीन पर टिक गए और पत्नी उसे गोद में लेकर बिलखने लगी।

अब आगे क्या… 3 सदस्यीय टीम गठित की है, जल्द ही समाधान होगा: एसडीएम अंजली शाह ने बताया किसान निजी जमीन में से ही रास्ता चाह रहा है। जो नियमानुसार नही है। मामले में जांच के लिए हमने 3 सदस्यीय टीम गठित कर दी है।

हमारे सिस्टम की कमजोरी… सोच कर आया था आज फैसला नहीं हुआ तो वहीं मर जाऊंगा
किसान ने बताया कि दो महीने पहले ही मैंने 1.404 हेक्टेयर के अपने खेत का सीमांकन करवाया था। इसके बाद से पड़ोसी खेत के मालिक ओमकार सिंह ने रास्ता बंद कर दिया। पहले मैं सरकारी गोहे से होकर खेत तक जाता था लेकिन अब ओमकार ने कब्जा कर लिया है। मैंने तहसीलदार, एसडीएम और कलेक्टर को भी खेत में रास्ता दिलवाने के लिए आवेदन दिए लेकिन सुनवाई कहीं नहीं हो रही। दो बार पलेवा कर चुका हूं, लेकिन बोवनी नहीं कर पा रहा हूं। आसपास के खेत हरे-भरे हैं सिर्फ मेरा खेत ही खाली पड़ा है। अब तो भूखों मरने की नौबत आ गई है। इस वजह से आज सुबह जब घर से निकला था तो यही सोच कर निकला था कि यदि आज फैसला नहीं हुआ तो वहीं पर मर जाऊंगा।

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