Tuesday, September 29

ये कैसा धर्म !

बेंगलुरु ने एकबार फिर पूरी दुनिया को सोचने मजबूर कर दिया । ऐसा कैंसा धर्म है जो बात बात पर काटने ,मारने आगजनी करने ,तोडफ़ोड़ करने की इजाजत देता है ओर यदि धर्म इजाजत नहीं देता तो ये जाहिल धर्म का सहारा क्यों लेते है ओर इनके धार्मिक गुरु ओर पूरी कौम मुहूं बंद करके क्यों बैठी रहती है ।

धर्म तो करुणा का नाम है धर्म दया सिखाता है धर्म न्याय का मार्ग बताता है धर्म रक्षा करने की प्रेरणा देता है धर्म मानव के कल्याण कि कामना का नाम है । ओर यदि कोई धर्म यह नहीं सिखा पा रहा तो वह धर्म नहीं हो सकता ।

बेंगलुरु कि घटना की जितनी निन्दा की जाये वह कम है क्योंकि वहां जो कुछ हुआ वह एक तरह का षड्यंत्र है । यदि किसी व्यक्ति ने गलती की तो उसकी थाने मे रिपोर्ट होनी चाहिए यदि थाने में नहीं सुना जा रहा तो न्यायालय है ।पर ऐसा थोडी की तुम ही न्यायाधीश वन जाओ ओर पूरे शहर को आगजनी की चपेट में ले लो ।यह तो शुद्ध आतंकवाद है ।क्योंकि कोई भी धार्मिक व्यक्ति हिंसा नहीं करेगा वह नीति के मार्ग से अपनी बात रखेगा ।

हम ये नहीं कह रहे की गलती करनेवाला सही है हो सकता है किसी ने बगैर समझे कुछ गलत लिख दिया इसका मतलब यह नहीं पूरा शहर जला दो ।बहुत गलत है ये घटनाएं आनेवाली पीढियों को सिर्फ़ नासूर ही दे सकती है । इसलिए इस तरह की मानसिकता पर रोक लगनी चाहिए ।

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