राष्ट्रवाद एक संस्कार जो मात्रभूमि से प्रेम करने से ही आता है।

भले ही हम लाख झगडे कर पर बुरे वक्त मे साथ आ ही जाते है ।इसी तरह देश की राजनैतिक पार्टियों में भाले ही सत्ता के लिए खींचतान चलती हो पर देश की बात आती है तव सभी पार्टियां एक साथ आ जाती है ।आखिर दिल है हिंदुस्तानी जो अपनी माटी अपने वतन के लिए मचलने लगता है ।पर इसबार चीन से लद्दाख में युद्ध सी स्थिति के दौरान जव देश की सभी राजनैतिक पार्टियां प्रधानमंत्री मोदीजी के साथ दिखाई दे रही है उस समय देश की सवसे पुरानी पार्टी कांग्रेस का केन्द्र सरकार को निशाना बनाना कहीं से भी तर्कसंगत नजर नहीं आ रहा है इससे तो ऐसा लग रहा है देश पर राज करना अलग बात है ओर देशप्रेम अलग ।

ऐसा पहली बार हो रहा है जव संकट के समय एक राष्ट्रीय पार्टी ऐसा व्यवहार कर रही है इस समय तो कंधे से कंधा मिलाकर चलने का समय था ।देश ही नहीं पूरी दुनिया को यह संदेश देने का समय था पर लगता हझ साठ सालों तक सत्ता पर काबिज रहनेवाली कांग्रेस में राष्ट्रवाद का बीज रोपित नहीं हो पाया नहीं तो कोई कारण नहीं की ऐसे अवसर पर राजनीति करते ।

धन्य हैं वो नेता शरद पवार, ममता बनर्जी ,मायवती ,अरविंद केजरीवाल सहित तमाम वो लोग जो इस संकट की घडी में केंद्र सरकार के साथ खडे है। सिवाय कांग्रेस को छोड तभी तो लगने लगा है राष्ट्रवाद भी एक संस्कार है जो सिर्फ़ अपनी मात्रभूमि से प्रेम करने से ही आता है।

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