Sunday, September 27

Day: May 9, 2020

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मजदूरों का दुर्भाग्य!

मजदूरों को लेकर राज्य सरकारों का रवैया बहुत ही गैरजिम्मेदाराना दिखाई दिया ।लॉकडाउन के बाद से ही राज्य सरकारें खासकर मजदूरों के प्रबंधन मे फेल रही है,लाखों लोगों को फ्री खाना के फोटो ओर विज्ञापनों ने मजदूरों की असली समस्या को दिखाया ही नहीं । दूसरे प्रशासन उन जाहिलों मे उलझा रहा जो लॉकडाउन को तोडने मे अपनी शान समझ रहे थे ,उन से जैसे तैसें निपटे तो तबलीगियो का जाहिलपन आ गया ,ओर इस जाहिलपन ने देश की व्यवस्था को बहुत नुकसान पहुंचाया शासन-प्रशासन को इनसे निपटने मे अपने सारे संसाधन लगाने पडे ओर इस बीच उस मजदूर की आश टूटती चली गई ।मकान मालिक को किराया चाहिए, मिल मालिकों ने काम से भगा दिया ,दो बक्त की रोटी की आश ओर असमंजस भरा जीवन पैदल चलने को मजबूर कर दिया। दुर्भाग्य देखिए जिन तबलीगियो ने शासन को सहयोग तक नहीं किया फिर भी शासन उनकी खिदमत मे लगा रहा ओर वो विचारा मजदूर अपने गांव जाने की...
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21 दिन बाद भी ,संत अकेले “पालघर”

महाराष्ट्र के पालघर मे 16अप्रैल को दो संतो सहित उनके ड्राइवर की हत्या कर दी थी ,उसके बाद से ही संत समाज के साथ ,देश के लोग पालघर कि सच्चाई सामने लाने के लिए बारबार आबज उठा रहे हे ,पर महाराष्ट्र सरकार उनकी इस मांग को गंभीरता से नहीं ले रही , दिखाने के लिए करीब सौ लोगो पर मुकदमे दर्ज कर लिए हे पर ठोस कार्यवाही अभी तक नहीं हुई। पालघर की घटना कोई छोटी घटना नहीं हे ,क्योंकि जिस तरह का कृत्य अपराधियों ने किया है वह साधारण नहीं था ,क्योंकि यहां घटना एक सोची समझी साजिश दिखाई दे रही है तो क्यों न इसकी जांच सीबीआई से कराई जाये ऐसा कराने मे राज्य सरकार को खुद से आगे आना चाहिए था पर वो उन लोगों पर सवाल उठाने मे लगी हे जो उस पर सबाल खडे कर रहे हैं। दुख इस बात का है ये कैसा हिंदुस्तान हे कैसा भारत ओर कैसा आर्यवर्त है।जहां सनातन हिंदू संत भी सुरक्षित नहीं हे उनके साथ निरंतर कोई न कोई घटना घट र...