Tuesday, September 29

मीडिया टायकून रूपर्ट मर्डोक ने मोदी को बताया आजाद भारत का बेस्ट लीडर

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न्यूयॉर्क। अमेरिका दौरे के पहले दिन गुरुवार को पीएम मोदी ने Fortune 500 में शामिल 40 टॉप CEO’s के अलावा कुछ ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों के मालिकों से भी मुलाकात की। इसमें न्यूज कॉर्पोरेशन कंपनी के सीईओ और मीडिया मुगल कहलाए जाने वाले रूपर्ट मर्डोक भी शामिल थे। मर्डोक ने मीटिंग के बाद ट्वीट कर मोदी की तारीफ की। फोर्ब्स मैगजीन के मुताबिक, मर्डोक की नेटवर्थ 12.4 बिलियन डॉलर (75 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा) है।

“पीएम मोदी के साथ अच्छा समय गुजरा। आजादी के बाद वह बेस्ट पॉलिसी लेकर आने वाले बेस्ट लीडर हैं। हालांकि, एक जटिल देश में बड़े टारगेट अचीव करना चुनौती है।”)
कौन हैं रूपर्ट मर्डोक?
> काॅम कास्ट के बाद दुनिया के दूसरे सबसे बड़े मीडिया ग्रुप ‘न्यूज कॉर्प’ और ट्वेंटी फर्स्ट सेंचुरी फॉक्स के चेयरमैन। न्यूज कॉर्प कंपनी मर्डोक के प्रिंट और पब्लिशिंग हाउस का काम देखती है।
>मर्डोक अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के बड़े न्यूजपेपर और चैनल्स के मालिक हैं। ब्रिटेन में मशहूर द टाइम्स, संडे टाइम्स, द सन समेत कई अखबारों के मालिक।
>अमेरिका में वॉल स्ट्रीट जर्नल, न्यूयॉर्क पोस्ट, डाऊ जोन्स लोकल मीडिया ग्रुप, 7 न्यूज इनफॉर्मेशन सर्विसेज, फॉक्स टीवी ग्रुप और स्काई इतालिया समेत कई मीडिया कंपनियों का मालिकाना हक।
>ऑस्ट्रेलियाई मूल के अमेरिकी नागरिक मर्डोक की Twenty-First Century Fox फिल्म और टेलिविजन इंडस्ट्री की नामी कंपनी है। स्पोर्ट्स का मशहूर चैनल स्टार स्पोर्ट्स के मालिक।
>उन्होंने हांगकांग में स्टार टीवी को खरीदा तो पूरे एशिया के सैटेलाइट टेलिविजन बिजनेस पर उनका दबदबा हो गया। भारत में स्टार टीवी समूह उसी का हिस्सा रहा है।
>भारत के टाटा स्काई में भी रूपर्ड मर्डोक की कंपनियों का 20 प्रतिशत हिस्सा है। मशहूर टीवी चैनल नेशनल जियोग्राफिक और ब्रिटिश स्काई ब्रॉडकास्टर में भी उनकी हिस्सेदारी है।
>2000 तक न्यूजकॉर्प में 800 कंपनीज शामिल थीं और 50 देशों में उनका बिजनेस था। फोर्ब्स ने रिचेस्ट अमेरिकन 2013 की लिस्ट में मर्डोक को 33वें नंबर पर रखा था। वर्ल्ड में उनकी रैंकिंग 91 थी।
>दौलत और बिजनेस के अलावा अपनी शादी को लेकर भी चर्चा में रहे। रूपर्ट ने अब तक तीन शादियां की हैं, जिनसे उनके 6 बच्चे हैं।
मर्डोक से जुड़ी कंट्रोवर्सीज
चटपटी खबरें और तेज-तर्रार बनने की चाह में मर्डोक के अखबार ‘न्यूज ऑफ द वर्ल्ड’ ने प्राइवेट जासूसों का सहारा लिया और कुछ लोगों की जासूसी तक कराई। मामला खुला तो मर्डोक और न्यूजपेपर को शर्मिंदगी झेलनी पड़ी। 2011 में 168 साल पुराने इस अखबार को बंद कर दिया गया। उन पर अपनी न्यूज से पॉलिटिकल पार्टीज को लाभ पहुंचाने का भी आरोप लगता रहा है।

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