Saturday, October 31

गुंडा अभियान को सीएम ने सराहा, उस पर मानव आयोग ने मांगा जवाब

shivraj_1432077705इंदौर. इंदौर के गुंडा अभियान की मुख्यमंत्री ने सराहना की और पूरे प्रदेश में इसे चलाने के लिए निर्देशित किया। दूसरी तरफ प्रदेश का मानव अधिकार आयोग गुंडों पर चिंता जताते हुए उन्हें आम नागरिक मानकर पुलिस से ही जवाब मांग रहा है। इंदौर में गुंडों के खौफ से लोगों का जीना दुश्वार होता जा रहा है, कोई भी कभी भी किसी को चाकू मार देता है। सवाल यह नहीं कि गुंडों को सरेआम मारना कितना सही या गलत, सवाल है कि जब भी गुंडों की पिटाई होती है तब ही मानव अधिकार आयोग सक्रिय क्यों होता है? क्या गुंडों को सम्मान के साथ थाने बुलाया जाए? क्या जनता को गुंडों के रहमोकरम पर छोड़ दिया जाए? जनता पर होने वाले अत्याचार को लेकर आयोग कभी कोई पत्र क्यों नहीं लिखता है?

इंदौर में बढ़ते गुंडाराज को देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने पुलिस को फ्री हैंड देते हुए कहा गुंडों को सरेआम पीटें, ताकि लोगों में उनका भय खत्म और गुंडों का रसूख कम हो। सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में सीएम ने इंदौर के गुंडा अभियान की तारीफ कर पूरे प्रदेश में ऐसा करने की नसीहत दी। वहीं, इंदौर डीआईजी को हाल ही में मानव अधिकार आयोग से पत्र मिला है। इसमें अभियान पर सवाल उठाते हुए डीआईजी से जवाब मांगा है। पत्र में गुंडों की पिटाई पर चिंता जताते हुए पूछा कि पुलिस गिरफ्तार आरोपियों को डंडे मारते दिख रही है। रात में पुलिस दुकान में घुसकर लोगों को डंडे मारती है। क्या यह मानवीय दृष्टिकोण से सही है?
शहर को हिला देने वाली घटनाओं से आयोग को फर्क नहीं पड़ा
शहर में पांच साल पहले गुंडे बिरजू ने एक साल के बच्चे अरमान की गोली मारकर हत्या की। पिछली होली पर गुंडों ने राहगीरों को चाकू मारे। तीन की जान ली। इस होली पर राजबाड़ा पर महिलाओं के साथ अभद्रता हुई। गुंडों ने पंपकर्मी छात्र की हत्या कर दी। इंदौर में वारदात करते हुए उज्जैन में एएसआई को लूटकर हत्या की। इनके अलावा इंदौर में ऐसे कई मामले हुए, जिनसे जनता खौफ में आ गई। इनमें से किसी भी मामले में मानव अधिकार आयोग ने न कभी संज्ञान लिया और न ही पुलिस से जवाब मांगा।
हम जवाब दे रहे हैं
गुंडा अभियान को लेकर मानव अधिकार आयोग से पत्र मिला है। इसमें पूछा गया है कि जिन्हें पुलिस ने डंडे मारे क्या वह मानवीय दृष्टिकोण से सही है। हम इसका जवाब दे रहे हैं। सीरियल चाकूबाजी, लूट, हत्या के मामले में पुलिस को आयोग से पत्र नहीं मिले हैं। – राकेश गुप्ता, डीआईजी
हम तो सिर्फ जानना चाहते हैं कि वे वाकई गुंडे हैं…
इंदौर पुलिस को पत्र भेजने वाले मानव अधिकार आयोग के अपर संचालक जनसंपर्क एलआर सिसौदिया से सीधी बात
मानव अधिकार आयोग ने गुंडों की पिटाई पर संज्ञान क्यों लिया? जबकि मुख्यमंत्री खुद इसे सही मानते हैं ?
हमने जो फोटो मीडिया में देखे वह संवेदनाएं जगाने वाले थे। लोगों को बुरी तरह पीटा जा रहा था।
जिन्हें भी पीटा गया वे तो लिस्टेड गुंडे हैं, हत्या, लूट, चाकूबाजी करते हैं?
– हमें यह नहीं पता था, इसलिए तो पत्र लिखकर पूछा कि क्या वे वाकई गुंडे हैं।
मीडिया में तो आरोपियों के रिकॉर्ड भी छपे थे, क्या आयोग गुंडों के पक्ष में है?
नहीं आयोग गुंडों के पक्ष में नहीं है।
लूट, सरेआम हत्या, चाकूबाजी की घटनाओं में आयोग ने कभी पत्र नहीं भेजा?
– 
हमें जो मामले मानवीय संवेदनाओं से जुड़े लगते हैं, उनमें संज्ञान लेते हैं।

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