Wednesday, September 30

विदिशा-प्रभु राम ने रावण के प्राणों का अंत कर दिया

1235विदिशा। नगर की ऐतिहासिक रामलीला के 114वें वर्ष में सोमवार को राम और रावण की सेना के बीच भीषण संग्राम की लीला का मंचन किया गया। इसके बाद अग्निबाण के संधान से प्रभु राम ने रावण के प्राणों का अंत कर दिया।

राम ने एकसाथ इकतीस तीर छोड़कर रावण के दसों शीश और बीसों भुजाएं काट दी। इसके बाद कराल बाण के प्रहार से उसकी नाभिकुंड का अमृत भी सोख लिया। इससे रावण धराशायी हुआ। इससे पहले राम और रावण की सेनाओं के मध्य भीषण युद्ध हुआ। रावण के 40 फीट ऊंचे पुतले का दहन भी किया गयारावण वध की लीला का मंचन और रंगीन आतिशबाजी का नजारा देखने के लिए रामलीला के स्टेडियम में करीब 50 हजार दर्शक जिले भर से आए थे। लोगों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विदिशा और भोपाल से भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था। महिलाओं और पुरुषों के बैठने की व्यवस्था अलग-अलग की गई थी। पुलिस प्रशासन ने रामलीला रोड से भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया था।

मायापति राम को रावण ने दिखाई अपनी अपनी माया

रामलीला शुरू होने से पहले भगवान श्री गणेश, देवी सरस्वती और देवर्षि नारदजी की परिक्रमा की गई। इसके बाद काली वेशभूषा में रावण की सेना और लाल वेशभूषा में श्रीरामजी की सेना का सामना हुआ। दोनों ओर से हर-हर महादेव और जय लंकेश के स्वर गुंजायमान हो रहे थे।

इसके बाद रावण ने मायापति राम को अपनी माया से भ्रमित करने का प्रयास किया। राम ने रावण की माया का अंत कर दिया

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