दिनांक 11 July 2020 समय 2:31 PM
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रक्तरंजिततिरंगाऔरभोपालकाभारतमें_विलय

सोचो सागर जिले का राहतगढ, विदिशा का कुरवाई, मेरा सुल्तानपुर, आपका सीहोर वहैरह भारत में न होकर पाकिस्तान का अंग होते? कंपकंपी छूट गई न ! जी यह कल्पना नहीं है यह षडयंत्र रचा गया था।
आप सब जानते हैं कि भारत 15 अगस्त 1947 को आजाद हो गया था। लेकिन भोपाल? जी हाँ भोपाल को तिरंगा करीब दो साल बाद आज के दिन देश में सबसे आखिर मे 1 जून 1949 को नसीब हुआ था, वह भी आजादी की लड़ाई लड़ते हुये शहीदों के खून से सना हुआ। आजाद भारत में तिरंगा फहराने पर गोलियों का उपहार देने का बद्नुमा दाग लगाया है भोपाल के नवाब हमीदुल्ला खान नें, जिसके नाम पर भोपाल के अस्पताल और कॉलेज हैं। आईये थोड़ा सा इन जख्मों को कुरेद कर तिरंगे पर लगे खून को प्रणाम करते हैं।
प्राकृतिक रूप से सात पहाड़ी और सात झीलों वाला भोपाल देश का एक खूबसूरत शहर जिसे 1000 ईस्वी में राजा भोज ने बसाया था। सदियों यह परमारों का महत्वपूर्ण नगर रहा। बाद में इस पर गौंड शासकों का अधिपत्य रहा। बाकी बातें बाद में कभी करेंगे।गौंड राजा निजाम शाह की अप्रतिम सौंदर्य की धनी और एक नन्हे बालक नवल शाह की माँ, विधवा रानी कमलापति यहां की अंतिम गौंड रानी थी। निजाम शाह की हत्या धोखे से जहर देकर उसके भतीजे चैन सिंह ने राज्य और अपनी चाची रानी कमलापति को पाने के लिये करवा दी थी। अफगानिस्तान से हींग बेचने आये फिर दिल्ली में सैनिक बने दोस्त मोहम्मद को संकट में राखी बांध कर रानी ने राज्य की रक्षा का वचन लिया था। लेकिन रानी को क्या पता था कि यह राखी उसके गले का फंदा बनेगी और राज्य की रक्षा की गुहार लगाने वाली बहन को कमला महल से कूद कर अपने सतित्व की ही रक्षा हेतु प्राण देना पडेंगे। हलाल पुरा लाल घाटी पर रानी कमलापति के 14 वर्ष के बेटे ने सिर्फ 100 लोगों के दल के साथ दोस्त मोहम्मद से युद्ध किया किंतु वह हार गया रानी को जब कोई रास्ता न दिखा तो उसने भोपाल ताल में बने अपने महल में पानी को प्रवेश करा कर प्राण त्याग दिये,और भोपाल पर अफगानी हींग वाले का कब्जा हो गया। सन 1723 से भोपाल में परमार और गौंड काल का अंत दोस्त मोहम्मद की ताजपोशी से हुआ।
जब देश आजाद हुआ तब भोपाल का नवाब हमीदुल्लाह खान था। हमीदुल्लाह अलीगढ़ विश्वविद्यालय से शिक्षित था।बहुत ही कुशाग्र और कूटनीतिज्ञ था।वह 1944 से चेम्बर ऑफ प्रिंसेस का चांसलर होने के कारण सम्पर्क और शोहरत में काफी आगे था। भोपाल राज्य हैदराबाद के बाद सबसे बड़ा व धनी मुस्लिम स्टेट था। हमीदुल्लाह की मोहम्मद अली जिन्हा से बेहद नजदीकियां थीं। आजादी के समय हमीदुल्लाह खान ने भी भोपाल को य तो स्वतंत्र य पाकिस्तान में विलय करने का मन बना रखा था। जिन्हा ने नवाब को पाकिस्तान का सेक्रेटरी जनरल बनाने का वायदा भी किया हुआ था। अब आप सोच कर जरा अपनी झुरझुरी रोकिये कि भोपाल, सीहोर, नसरुल्लागंज, रेंहटी ओबेदुल्लागंज, बेगमगंज, सुल्तानपुर, रायसेन, कुरवाई और राहतगढ़ जैसा विशाल क्षेत्र पाकिस्तान में होता तो क्या स्थितियां होतीं। नवाब हमीदुल्लाह ने अपनी बड़ी बेटी आबिदा को उसके बेटे शहरयार के साथ पाकिस्तान भेज दिया।अभी कुछ दिन पहले पाकिस्तान का विदेश सचिव और वर्तमान में वहां के क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड का प्रमुख शहरयार खान भोपाल नवाब हमीदुल्लाह खान का नाती है।

देश आजाद हुआ, जगह जगह तिरंगा फहराया गया लेकिन भोपाल के जुमेराती चौक में जब तिरंगा फहराने हेतु लोग आये तो उन पर नवाब की लाठियां चलीं। तिरंगा फहराना यहां अपराध घोषित किया गया। नवाब ने चतुरनारायण मालवीय को अपना प्रधान मंत्री बना कर विलीनीकरण आंदोलन में फूट डालने का प्रयास किया। दिसम्बर 1948 को विलीनीकरण आंदोलन ने उग्र रूप ले लिया। प्रजा मंडल के आंदोलन कारियों पर लाठियां बरसने लगी थीं। डॉ. शंकरदयाल शर्मा, ठाकुर लाल सिंह, उद्धवदास मेहता, भैरोप्रसाद जैसे नेता जेल भेज दिये गये। 14 जनवरी को रायसेन जिले के बौरास गांव में संक्राती मेले में तिरंगा फहराने पर नवाब के थानेदार ज़फर अली ने गोली चला दी।गोली चालन किया गया जिसमें धनसिंग, मंगल सिंह,विशाल सिंह और 16 वर्षीय छोटेलाल चार लोग वहीं शहीद हो गये, लेकिन उन्होने तिरंगा जमीन पर नहीं रखा। खून से सना यह तिरंगा बाद में शहीदों के परिजनों को मिला। यह तिरंगा आज भी उदयपुरा जिला रायसेन में डॉ. विजय मालानी के पास सुरक्षित है। तीन लोग बाद में प्राण त्याग कर भोपाल की सरजमीं पर अपना नाम लिखा गये। प्रधान मंत्री चतुरनारायण जी इस घटना से व्यथित हुये और वे इक्कीस दिन के उपवास पर बैठ गये। नवाब ने क्रोधित होकर 29 जनवरी को मंत्रीमंडल को बरखास्त कर सत्ता अपने हाथ में ले ली। और भारत को धमकाने लगा। आखिर वीपी मेनन और पटेल ने अपनी आँख तरेरी और नवाब को बता दिया कि विलय करो य मरो। तो इस नवाब ने 30 अप्रैल सन 1949 को विलय के पत्र पर हस्ताक्षर किये। इस तरह देश के मध्य में एक और कश्मीर होने से बच गया।और भोपाल भारत का निर्विवाद हिस्सा हो गया।
आज के दिन 1 जून 1949 को भारत गणराज्य की ओर से नियुक्त चीफ कमीश्रनर श्री एन बी बैनर्जी ने 225 साल पुराने नवाबी परचम को लाल कोठी से उतार कर भारत का तिरंगा फहरा कर उसे सलामी दी। भोपाल के लिये आज का दिन 15 अगस्त से कम नहीं है। जय हिंद।

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About Pradeep Rajpoot

Pradeep Rajpoot is a social activist, businessman and editor in chief of Betwa Anchal weekly news paper.
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