दिनांक 06 August 2020 समय 3:57 PM
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ये कैंसी मानसिकता ?

आज पूरे देश में विकास दुवे की ही चर्चा की जा रही है ।उसके भागने से लेकर मरने तक लोग उसी के ऊपर आरोप ओर बचाव पर अपना ज्ञान झाडने लगे है ।अव जव उसका मौत की नींद सुला दिया तो कुछ लोग उस पर भी राजनीति करने लगे है ।

जरा विचार कीजिए जिस दिन थाने में भाजपा नेता शुक्ला जी को मारा था उस दिन किस किसने आबाज उठाई थी । तव भी एक ब्राह्मण द्वारा दूसरे ब्राह्मण की हत्या की गई थी तव योगी जी नहीं थे । आज भी जो लोग विकास दुवे पर जाती बाली राजनीति कर रहे है ।क्या वो बता पायेंगे जिस दिन कश्मीर में आंतकवादियों ने ब्राह्मण नेता की हत्या की थी तव कहां थे । जव पालघर में साधुओं की हत्या हुई तव कहां थे।

प्रियंका बाड्रा भी योगी सरकार पर सबाल उठा रही है वो बता पायेंगी पालघर में साधुओं की हत्या के समय वो कहां थी ,कश्मीर में जो पंडित की हत्या हुई तव कहां थीं । क्या भाजपा शासन का ही अत्याचार दिखाई देता है ।

इसी तरह अखिलेश यादव भी खूव राजनीति कर रहे है पर अव जनता गुमराह होनेवाली नहीं है । अखिलेश यादव जी आपके शासन में तो गुंडे सरेराह लडकियों का रेप कर देते थे ओर कुछ नेता तो आपके आज भी जेल कि हवा खा रहे है ।आप पर स्वयं टोंटी निकलने का आरोप है । ऐसे में आपके द्वारा सिर्फ प्रदेश का माहोल खराब करने के अलावा ओर कुछ नहीं किया जा रहा।

उन लोगों को ये समझना पडेगा आपराधिक प्रवृत्ति किसी भी जाती के व्यक्ति की हो सकती है इसका मतलब ये नहीं पूरी जाती के लोग दोषी है ।गलत गलत ही होता है उसका परिणाम भी गलत ही होगा ये बात शाश्वत सत्य है जो लोग गलत का समर्थन करते है वो ऐसी ही प्रवृत्ति को पोषण का काम करते है। जव इस तरह के अपराधी किसी को प्रताडित करते है तो उस पीडित परिवार के दर्द का भी अहसास करके देखलो सव ज्ञान रखा रह जायेगा । आज वो सव परिवार खुश है जो विकास के द्वारा पीडित थे । बढा दुख होता है जव अपराधी को बचाने मानवाधिकार बाले आ जाते है पत्रकार आ जाते है ओर जाती के ठेकेदार आ जाते है ।ओर नेता तो उधार ही बैठे है ।ये किस तरह की मानसिकता ने इस देश में जन्म ले लिया है ।

नहीं तो..

एक समय वो था जव अपराध करनेवाले व्यक्ति का सामाजिक बहिष्कार किया जाता था । ये पंडित लोगों उसके घर का दाना पानी भी लेना पाप समझते थे। उसके यहां कोई नातेदारी करना पसंद नहीं करता था एक तरह से उसे समज से बहिष्कृत किया जाता था जिससॆ उसे गलती का अहसास हो ओर दूसरे लोग भी उससे सीख लें ।पर अव ये नई तरह की मानसिकता है।

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About Pradeep Rajpoot

Pradeep Rajpoot is a social activist, businessman and editor in chief of Betwa Anchal weekly news paper.
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