दिनांक 06 July 2020 समय 4:04 AM
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क्या मजदूरों के सहारे अपना, राजनैतिक ऐजेंडा पूरा करना चाहती है राज्य सरकारें।

पूरा विश्व भारत के प्रयासों की सराहना कर रहा है जिस तरह से केंद्र में मोदी सरकार ने निर्णय लिये है वो वाकई तारीफ के काबिल हैं।ओर सबसे बडी बात ये है देश के लोगों ने अपने से आगे आकर सरकार के निर्णयों का स्वागत किया ओर पूरा सहयोग दिया। 22 मार्च 2020 की तारीख देश के इतिहास का हिस्सा वन गई ,क्योंकि जिस तरह के निर्णय देश की सरकार ने लिए थे वो भारत ने पहली बार देख ओर सुने थे,उसके बाद से देश के नागरिक बराबर सरकार के दिशा निर्देश का पालन करते चले जा रहे थे ओर लॉकडाउन पर लॉकडाउन आते जा रहे थे ।

इसी बीच मजदूरों में भ्रम फैला कर व्यवस्था को ध्वस्त किया जाने का कार्य भी किया जा रहा था जो साफ तौर पर राज्य सरकारों के द्वारा किया जाना दिखाई दे रहा था। इस तरह के आरोपों को बल तव मिलता है जव ऐसी घटनाएं दिखाई पढती है।

  • क्या मजदूर राज्य सरकार कि इच्छा के खिलाफ घर से बहार निकल सकता है।
  • क्या मजदूर पैदल जा रहा ओर लोकल प्रशासन की निगाह से बच सकता है।
  • क्या अपने ही देश के मजदूरों से एक दूसरे राज्य के रूप मे भेदभाव करना न्याय है ।
  • क्या बसों का इंतजाम राज्य सरकारें आपस में एक्सचेंज करके नहीं कर सकते थे।
  • क्या रेलवे ट्रैक पर मजदूर बगैर लोकल प्रशासन की मर्जी के चल सकते थे ।
  • क्या राज्य सरकारों द्वारा लाखों लोगों को भोजन की बात की जा रही थी तो ये मजदूर भूखे प्यासे पैदल निकलने पर मजबूर क्यों हुए।
  • क्या राज्य सरकारें मिल मालिकों से सम्पर्क करके मजदूरों की घर वापसी सुनिश्चित नहीं कर सकती थीं।
  • ऐसे कई प्रश्नों ने सीधे सीधे राज्य सरकारों को कटघरे में खडा कर दिया है उसी में नेताओं द्वारा राजनीति करना बेहद अफसोस जनक लगता है।भला राजनीति करने बाले अपने राज्य मे बेहतर सुविधाएं देकर पूरे देश मे आदर्श प्रस्तुत करते ।पर उन्हें तो सुविधा से ज्यादा अपनी राजनीति चमकाना थी।

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About Pradeep Rajpoot

Pradeep Rajpoot is a social activist, businessman and editor in chief of Betwa Anchal weekly news paper.
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