दिनांक 15 December 2018 समय 12:45 PM
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कितना जायज है, पटवारियों का आक्रोश………

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ptwariगंजबासौदा। राजस्व विभाग की मूल कड़ी पटवरी उस वक्त लामबंद होते नजर आये जब गुना के एक कार्यक्रम में श्रीमती यशोधराराजे सिधिंया ने पटवारियों के खिलाफ आक्रोशित होते हुए तीखी टिप्पणी में कार्यवाही करने की बात कही। उनकी टिप्पणी के बाद मध्यप्रदेश के विदिशा जिले की तहसील गजंबासौदा के पटवारियों को भारी बुरा लगा और उन्होंने तहसीलदार महोदय को अपना ज्ञापन सौंप दिया।
आपको आज ऐसी कड़बी सच्चाई से अवगत कराना चाहते हैं की आज न्यायालय में चलने वाले मुकदमों में महत्ती भूमिका राजस्व विभाग की होती है। सीमांकन से लेकर बटान और नामांत्रण तक में भ्रष्टाचार की लम्बी कहानी लिखी जाती है और परिणाम स्वरूप न्यायालय पर अकारण मुकदमों का बोझ बड़ता है क्या राजस्व विभाग की मूल कड़ी पटवारी, आर.आई और तहसीलदार को होने वाले प्रकरणों में गलती के लिए जबावदेही तय नहीं कि जानी चाहिए। क्योंकि जिस कार्य के लिए वह रखे गए हैं और वह कार्य किसी भी तहर के प्रलोभन या दवाब में करते हैं और उससे सामने वाले व्यक्ति की क्षति होती है, तो क्यों न राजस्व विभाग की इस कड़ी पर जिम्मेदारी तय करते हुए कार्यवाही की जानी चाहिए। आज भले ही पटवारियों द्वारा तहसीलदार महोदय को ज्ञापन देकर वह अपने जिम्मेदारियों से बचने का प्रयास कर रहे हैं। पर सच्चाई यह है कि आज आम आदमी से लेकर किसान तक राजस्व विभाग के इन जिम्मेदार अधिकारियों के चक्कर लगा-लगा कर परेशान है। किसी की किताब नहीं बन रही, तो किसी का नामांत्रण नहीं हो रहा, तो किसी का सीमानांकन नहीं हो रहा और किसी की बटान नहीं हो रही। जबकि ऐसा नहीं है कि ये जिम्मेदार अधिकारी कार्य नहीं कर रहे हों। पर यह प्रभावशाली लोगों के अनैतिक कार्यों को अंजाम देने में लगे हुए हैं। इस बात को पटवारी से लेकर एसडीएम महोदय तक को जानकारी रहती है। पर जब कोई जिम्मेदार जनप्रतिनिधि कार्यवाही करने की बात करता है तो ज्ञापन देकर उस जनप्रतिनिधि के खिलाफ एक जुटता इस तरह दिखाते हैं और उस जनप्रतिनिधि के खिलाफ मुहीम शुरू कर देते हैं।
हाल ही में विदिशा जिले में ऐसे कई प्रकरण सामने आए हैं जिसमें पटवारी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े गए हैं। वैसे भी गंजबासौदा अधिकारियों के चारागाह मानी जाती है। गंजबासौदा के पटवारियों की यदि ईमानदारी से जांच करा दी जाए तो आय से अधिक सम्मपत्ति का मामला सामने आ सकता है। क्योंकि ऐसे कई अधिकारी हैं जिनके विकास की गाथा देखते ही देखते महलों में बदल गई।

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About Pradeep Rajpoot

Pradeep Rajpoot is a social activist, businessman and editor in chief of Betwa Anchal weekly news paper.
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