संपादकीय | BetwaAnchal Daily News Portal | Page 9
दिनांक 23 March 2019 समय 7:40 AM
Breaking News

Category Archives: संपादकीय

हमें पुन: खोजना होगा गांधी को

महात्मा गांधी अदï्भुत थे। अद्वितीय थे। विलक्षण थे। शायद यही वजह है है कि उनके एक प्रतिष्ठित समकालीन वैज्ञानिक को कहना पड़ा कि भावी पीढिय़ां मुश्किल से यकीन करेंगी कि हाड़-मांस का कोई ऐसा इंसान सचमुच इस धरती पर धूमता था। यद्यपि हमने उनसे अनुग्रहीत व सम्मोहित होकर उन्हें राष्ट्रपिता कहा, लेकिन आज हमारे बीच ऐसे लोग भी हैं, जो ... Read More »

आज चौथा स्तंभ बना मीडिया

चौथे स्तंभ का मतलब क्या है? क्या इसका मतलब सरकार बनना नहीं है? जब संविधान ने लोकतंत्र के तीन ही स्तंभ बताए हैं तब मीडिया अपने आप कब और कैसे उसका चौथा पाया बन गया? और यदि वह चौथा पाया बन ही गया है तब फिर क्या वह देश की वर्तमान दुर्दशा के लिए अन्य तीन स्तंभों की तरह चार ... Read More »

मुस्लिमों का भयादोहन करते मुलायम

मुजफ्फरनगर के भीषण दंगे के बाद मुसलमानों को सरकारी मदद देने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने उत्तरप्रदेश की सरकार को जिस तरह से लताड़ा है, उससे साफ होता जा रहा है कि यूपी सरकार भले ही मुस्लिमों का मसीहा होने के बड़े-बड़े दावे करे, मगर हकीकत में यह महज दिखावा है। पीछे मुड़कर देखें, तो साफ हो जाता है ... Read More »

समाज के रोके रूकेंगे बलात्कार

मैट्रो एक्सप्रेस डेनमार्क के प्रमुख समाचार पत्रों में से एक है। पहले उसकी उन पंक्तियों पर गौर कीजिए जो कि उसने हमारे देश की राजधानी दिल्ली में डेनमार्क की महिला के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद लिखी हैं। पत्र लिखता है कि भारत में महिलाएं पूरी तरह से असुरक्षित हैं। उनके मान-सम्मान को बरकरार रखने की कोई ... Read More »

आखिर विकलांग भी समाज के अंग हैं

शारीरिक रूप से अक्षम अथवा विकलांगों के प्रति समाज व सरकार दोनों का दायित्व है कि उन्हें सामान्य जिंदगी जीने के लिए प्रेरित किया जाए, पर दोनों स्तर पर ही कोताही नजर आती है। उनके प्रति सामाजिक नजरिया तो तंग होता ही है, लेकिन जब कोई लाकतांत्रिक सरकार उनकी उपेक्षा करती है, तो इसे समावेशी विकास की जरूरत के विरूद्ध ... Read More »

सैफईवादी समाजवाद की सीमाएं

सत्ता और सिद्धांतों के बीच क्या सिर्फ छत्तीस का ही रिश्ता हो सकता है? क्या हाथों में सत्ता के आते ही मूल्यों का तिरोहित हो जाना नियति है? क्या सत्ता उन मूल्यों की स्वभाव से ही विरोधी है, जिनके बहाने राजनीति और समाज संघर्ष करता है? उत्तरप्रदेश के समाजवादी आंदोलन व उसके मौजूदा रहनुमाओं के कारनामों को देखकर ये सवाल ... Read More »

कहीं नौकरशाही केजरीवाल को अपने सांचे में न ढाल ले

राजनीति के पारंपरिक तौर-तरीकों, तकाजो और मुहावरों से आम आदमी पार्टी का परहेज इस तरह खत्म होगा, शायद ही किसी ने सोचा हो। अरविंद केजरीवाल ने बाकायदा जनमत संग्रह कराकर दिल्ली में वीवीआईपी संस्कृति के खात्मे का दावा करने वाली ईमानदार सरकार बनाई, तो स्वाभाविक ही था कि नाना प्रकार की समस्याओं से पीडि़त आम लोग उन्हें तारनहार मान उनके ... Read More »

इस अंदाज व आगाज के मुकाम

वर्ष 2014 का राजनीतिक आगाज जिस अंदाज में हुआ है, उसने पूरे देश में कौतूहल का केंद्र दिल्ली में सरकार बनाने वाली आम आदमी पार्टी की कार्यशैली है। उसके नेता जिस शैली में सरकारी फैसले कर रहे हैं, जिस तरह विधायक मंत्री पैदल, मैट्रो, बसों, टैंपो, रिक्शा से जनता के बीच या दफ्तर जा रहे हें, उन सबसे ऐसा परिदृश्य ... Read More »

एमसीएमसी के दायित्वों से अवगत हुए मीडियाकर्मी

विदिशा: विधानसभा निर्वाचन के दौरान पेड न्यूज के नियंत्रण एवं माॅनिटरिंग के लिए गठित मीडिया सर्टिफिकेशन एण्ड माॅनिटरिंग कमेटी ;डब्डब्द्ध की कार्यप्रणाली से शुक्रवार को मीडियाकर्मियों को अवगत कराया गया। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी श्री एम0बी0ओझा की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई उक्त बैठक में प्रिन्ट एवं इलेक्ट्राॅनिक मीडियाकर्मियों के अलावा पुलिस अधीक्षक श्री धर्मेन्द्र चैधरी, अपर कलेक्टर श्री के0डी0त्रिपाठी, ... Read More »

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