भोपाल-कॉलोनी विकास की अनुमति देने की समयसीमा 90 दिन की बजाय 45 दिन की - BetwaAnchal Daily News PortalBetwaAnchal Daily News Portal
दिनांक 20 February 2019 समय 7:53 PM
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भोपाल-कॉलोनी विकास की अनुमति देने की समयसीमा 90 दिन की बजाय 45 दिन की

cccccccभोपाल. भोपाल समेत पूरे प्रदेश में कॉलोनी निर्माण में आने वाली अड़चनों को दूर करने के लिए राज्य सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। ज्यादा से ज्यादा कॉलोनियां बनें, इसके लिए अफसरों को विकास अनुमति से लेकर हर स्तर का काम तय डेडलाइन में करना होगा। कॉलोनी विकास की अनुमति देने की समयसीमा 90 दिन की बजाय 45 दिन की जाएगी।

जिन नियमों या प्रक्रियाओं के कारण देरी होती है, उन्हें भी हटाया जाएगा। यही नहीं, कॉलोनी में निर्माण कार्य पूरा करने और बुनियादी सुविधाएं देने के पांच साल बाद अपने आप ही नगर निगम में कॉलोनी का विलय हो जाएगा। ऐसे ही 32 सुधारों का मसौदा राज्य शासन ने तैयार किया है। विधानसभा सत्र के बाद इन सुधारों को एक-एक कर लागू किया जाएगा।
हाईराइज कमेटी को खत्म करना, लैंडयूज सर्टिफिकेट को सात दिन में जारी करना जैसे कुछ सुधारों के लिए नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग अप्रैल में सर्कुलर जारी करेगा। जबकि जिन सुधारों में दूसरे विभाग शामिल हैं, उनमें मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली समन्वय समिति फैसला लेगी। अधिनियम और नियम में बदलाव वाले सुधार एक साल के भीतर लागू होंगे।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार के निर्देश पर बिल्डिंग परमिशन, विकास अनुमति, पर्यावरण अनुमतियां, लैंड रिकॉर्ड आदि मुद्दों पर आने वाली कठिनाइयों को दूर करने के लिए राज्य सरकार यह कवायद कर रही है।
बदलाव से यह होगा असर 
कॉलोनी निर्माण की परमिशन के लिए हर काम तय वक्त में होने से अफसरों-कर्मचारियों की दखलअंदाजी कम होगी। नियम सरल होने से प्रोजेक्ट की कॉस्ट भी कम होगी और लोगों को कम कीमतों में मकान मिल सकेंगे। सभी के लिए प्रोजेक्ट लाना आसान होगा, जिससे स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
मेक इन इंडिया के लिए केंद्र का सुझाव 
केंद्र सरकार ने दिसंबर में मेक इन इंडिया के लिए राज्यों के अधिकार वाले क्षेत्र में अपने-अपने स्तर पर नियमों में सुधार के बिंदु सुझाए थे। मुख्य सचिव अंटोनी डिसा ने यह बिंदु नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग को दिए थे। इसके बाद बिल्डरों से चर्चा कर यह मसौदा तैयार हुआ।
यह संशोधन भी 
– हर जगह शपथ पत्र की जगह स्वघोषित प्रमाण पत्र लिया जाए।
– कॉलोनाइजर्स लाइसेंस के लिए पुलिस वेरिफिकेशन की जगह स्व प्रमाणित घोषणा-पत्र लगाया जाए।
– लैंडयूज चेंज की शर्तें सरल की जाए।
– विकास प्राधिकरणों को कॉलोनाइजर्स नियमों से बाहर किया जाए।
– पर्यावरण अनुमति के लिए टीएंडसीपी की परमिशन के पहले ही मंजूरी।
– अफसर अलग-अलग की बजाय एक ही तारीख में इंस्पेक्शन करें।
खाका तैयार
हमने प्रॉपर्टी और विकास से संबंधित दिक्कतों को दूर करने के नियमों को सरल करने का खाका तैयार किया है। एक-एक कर ये नियम लागू किए जाएंगे।
कैलाश विजयवर्गीय, नगरीय विकास एवं पर्यावरण मंत्री
एनओसी नहीं 
प्रोजेक्ट के लिए विकास प्राधिकरण और राजस्व से एनओसी लेने की बाध्यता खत्म होगी।
फायदा- एनओसी में लगने वाले एक महीने का वक्त और परेशानी बचेगी।
अनुमति साथ में
कॉलोनी की विकास अनुमति आैर बिल्डिंग परमिशन एक साथ मिल सकेगी।
फायदा- समय की बचत होगी। अफसरों का दखल कम होगा।
कॉलोनी सेल
टीएंडसीपी, नगर निगम और राजस्व विभाग के एक-एक अफसरों को कॉलोनी सेल में नियुक्त कर उन्हें पर्याप्त अधिकार दिए जाएंगे।
फायदा- एक ही जगह पर काम हो सकेंगे।
मॉर्टगेज 
95 प्रतिशत काम पूरा होने के बाद पूरी मॉर्टगेज प्रॉपर्टी छोड़ना और 5% काम के लिए बैंक गारंटी लेना।
फायदा- मॉर्टगेज प्रॉपर्टी छूटने से भ्रष्टाचार की शिकायतों में कमी आएगी।
आय प्रमाण
एलआईजी/ईडब्ल्यूएस के लिए स्वघोषित आय प्रमाण लिया जाएगा। इसे मॉर्टगेज प्रॉपर्टी से डीलिंक करेंगे।
फायदा- प्रोजेक्ट के ईडब्ल्यूएस/एलआईजी आसानी से बिक सकेंगे

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About Pradeep Rajpoot

Pradeep Rajpoot is a social activist, businessman and editor in chief of Betwa Anchal weekly news paper.
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