दिनांक 17 December 2018 समय 10:37 PM
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प्राइवेट कंपनियों में भी अब नहीं चलेगी घूसखोरी!

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Corruptionनई दिल्ली

केंद्र सरकार ऐसे कानून संसोधनों पर विचार कर रही है जिसके तहत विदेशी अधिकारियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के अधिकारियों को घूस देने का प्रयास अपराध माना जाएगा। 

इसके साथ ही सरकार विधायिका के स्तर पर भी ऐसे बदलाव लाना चाहती है, जिसके कारण भ्रष्टाचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र संधि (यूएनसीएसी) के नियमों पर भारत पूरी तरह खड़ा उतरे।

प्राइवेट सेक्टर में भी घूस लेने को अपराध करार दिए जाने के लिए गृह मंत्रालय भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में संशोधन पर विचार कर रहा है। इसे अमलीजामा पहनाने के लिए मंत्रालय ने सभी राज्यों को प्रस्तावित संशोधित विधेयक का एक ड्राफ्ट भेजा है और उनसे राय मांगी है। प्रस्तावित संशोधन में विधायिका के स्तर पर लंबित पड़े मसलों को भी तवज्जो दी गई है।

हमारे सहयोगी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया में पब्लिश एक आर्टिकल के जवाब में गृह मंत्रालय की ओर से कहा गया, ‘हम यूएनसीएसी के नियमों से अलग नहीं जा रहे हैं। प्राइवेट सेक्टर में घूस देना सामान्य आपराधिक कानून का हिस्सा है और मंत्रालय आईपीसी में संशोधन करने पर विचार कर रहा है।’

यूएनसीएसी के अनुच्छेद 16 पर खड़ा उतरने के मामले पर मंत्रालय ने कहा, ‘इस अनुच्छेद को ध्यान में रखते हुए सरकार ने संसद में विदेशी सरकारी अधिकारियों और सार्वजनिक अंतरराष्ट्रीय संगठन के अधिकारियों को रिश्वत की रोकथाम बिल, 2011 (Prevention of Bribery of Foreign Public Officials and Officials of Public International Organizations Bill, 2011) पेश किया था।

गृह मंत्रालय के अधिकारी ने कहा, ’15वीं लोकसभा के भंग होने के साथ ही उपरोक्त बिल की समय सीमा खत्म हो गई है, लेकिन विदेशियों से रिश्वत के लेन-देने पर लगाम लगाने और इसे अपराध की श्रेणी में डालने के लिए केंद्र सरकार एक नए बिल को पेश करने पर विचार कर रही है।

टाइम्स ऑफ इंडिया ने इससे पहले भी अपने एक आर्टिकल में बताया था कि भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम में जो प्रस्तावित संशोधन है, उसमें प्राइवेट सेक्टर में रिश्वतखोरी पर लगाम लगाने पर बहुत कम ध्यान दिया गया है। प्राइवेट सेक्टर में रिश्वतखोरी पर लगाम लगाना भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम संशोधन का फोकस होना चाहिए। उस संशोधन में हालांकि सरकार ने प्राइवेट सेक्टर के अधिकारियों द्वारा सरकारी अधिकारियों को रिश्वत देने पर जरूर कुछ प्रावधान रखे थे पर प्राइवेट सेक्टर में होने वाली घूस की लेन-देन पर ध्यान नहीं दिया था।

भ्रष्टाचार के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र संधि (यूएनसीएसी) के अनुच्छेद 12 की बात करें तो यह प्राइवेट सेक्टर में भ्रष्टाचार, प्राइवेट सेक्टर में ऑडिटिंग के स्टैंडर्ड को बढ़ाने के साथ-साथ इन नियमों की अनदेखी करने वाली कंपनियों पर प्रशासनिक और आपराधिक दंड के संबंध में है

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About Pradeep Rajpoot

Pradeep Rajpoot is a social activist, businessman and editor in chief of Betwa Anchal weekly news paper.
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