दिनांक 23 July 2018 समय 1:45 AM
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बजट 2015: थोड़ा मोदी इफेक्ट, थोड़ा जेटली विजन

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modi-leadनई दिल्ली

मोदी सरकार के पहले आम बजट में जहां पीएम मोदी का इफेक्ट नजर आया, वही वित्त मंत्री अरुण जेटली का विजन पूरी तरह से उभरकर सामने आया। बेशक बजट पर पीएमओ का कंट्रोल रहा, पर कई मामलों में जेटली की विजन साफ तौर पर दिखा है 

मोदी इफेक्ट:

पब्लिक इनवेस्ट: मोदी की चाहत थी कि हर सेक्टर में पब्लिक इन्वेस्टमेंट बढ़े, ताकि देश में कैपिटल फ्लो बढ़े, टेक्नॉलजी एडवांस हो और प्रॉजेक्ट पूरा होने में देरी न हो। यही कारण है कि बजट में साल 2015-16 में पब्लिक इनवेस्ट का टारगेट 1.25 लाख करो़ड़ रुपये रखा गया है। इसमें शहरी इंफ्रास्ट्रक्टर के लिए 25,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

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मेक इन इंडिया का जोर: बजट में मेक इन इंडिया का पूरा जोर देखने को मिला है। मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बजट में कई प्रावधान किए हैं। स्किल्ड डिवेलपमेंट और इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने के लिए कई प्रावधान किए गए है। यह भी कहा गया है कि बिजनस शुरू करने के लिए कई तरह की सुविधाएं देने पर विचार किया जा रहा है।

घरेलू सेविंग और इनवेस्टमेंट पर फोकस: मोदी ने हमेशा घरेलू सेविंग रेट और इन्वेस्टमेंट बढ़ाने पर जोर दिया। उनका मानना है कि देश के लोगों को कुछ दो, मगर बदले में उनसे इन्वेस्टमेंट के तौर पर कुछ लो। यही कारण है कि इस बार सीनियर सिटीजन को काफी छूट दी गई है। पेंशन के नाम पर जमा की जाने वाली राशि पर छूट बढ़ा दी गई है।

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ग्रोथ पर नजर: सरकार किसी भी तरह से इकनॉमी ग्रोथ रेट बढ़ाना चाहती है। इसके चलते ही बजट को काफी हद तक ग्रोथ पर फोकस रखा गया। सरकारी खर्च घटाकर वित्तीय घाटे को 3 प्रतिशत लाने की बात कही गई है।

जेटली विजन:

इनकम टैक्स में बदलाव नहीं: वित्त मंत्री अरुण जेटली का विजन है कि टैक्स कलेक्शन बढ़ाया जाए। 124 करोड़ की आबादी वाले देश में इनकम टैक्स पेयर्स की संख्या 4 करोड़ से भी कम है। जेटली का विजन है कि पहले टैक्स पेयर्स की संख्या बढ़ाओ, फिर छूट पाओ।

डीटीसी को छोड़ा: डायरेक्ट टैक्स कोड (डीटीसी) को बजट में छोड़ देने की बात कही गई है। जेटली के विजन में डीटीसी को इतनी जल्दी लागू करना ठीक नहीं है। डीटीसी में इनकम टैक्स छूट सीमा 5 लाख और इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव की बात कही गई है।

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जीएएआर पर अड़े नहीं: वित्त मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार जीएएआर को आगे करने की बात जेटली की है। जेटली का तर्क है कि काफी समय और पैसा टैक्स मामलों के निपटान में चला जाता है। जब तक सिस्टम सही न हो जाए और निवेश में बढ़ोतरी न हो, जीएआर को टालना ठीक होगा।

बैंकिग सेक्टर का विस्तार: जेटली बैंकिंग सेक्टर का विस्तार चाहते हैं ताकि लोन देने का दायरा बढ़े। बिजनस करने के लिए लोग आगे आएं। इसी बात के मद्देनजर उन्होंने मुद्रा बैंक के गठन की घोषणा की है ताकि छोटे बिजनेस मैन को लोन दिया जा सके

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About Pradeep Rajpoot

Pradeep Rajpoot is a social activist, businessman and editor in chief of Betwa Anchal weekly news paper.
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