दिनांक 18 December 2017 समय 1:14 AM
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रेल बजट में 100 से कम नई ट्रेनों को हरी झंडी

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railनई दिल्ली 

रेलवे गंभीर वित्तीय संकट का बोझ झेल रहा है। ऐसे मेंवित्त वर्ष 2015-16 के रेल बजट में नई ट्रेनों की घोषणा का आंकड़ा 100 से कम रहने की संभावना है । यह आमतौर पर प्रत्येक साल होने वाली घोषणाओं से काफी कम है।

रेल मंत्री सुरेश प्रभु को सुधार समर्थक माना जाता है। माना जा रहा है कि प्रभु रेल बजट में कई राज्यों की मांग के बावजूद अधिक नई ट्रेनों की घोषणा नहीं करेंगे, क्योंकि फंड की कमी से रेलवे का काफी काम बरसों से अटका हुआ है।

आमतौर पर रेल बजट में हर साल 150 से 180 नई ट्रेनों की घोषणा होती है। पिछले साल ही करीब 160 नई ट्रेनों की घोषणा हुई थी। सूत्रों के अनुसार प्रभु इस मामले में अलग रख अपना सकते हैं और संभवत: अपने पहले रेल बजट भाषण में वह अधिक नई ट्रेनों की घोषणा नहीं करेंगे। हालांकि, साल के दौरान आगे चलकर वह ऐसा कर सकते हैं। सूत्रों ने बताया कि रेल बजट में अधिक नई ट्रेनों की घोषणा न करने की लाभ-हानि का आकलन करने के बाद अब संशोधित प्रस्ताव को आगे बढ़ाया गया है। इसमें बहुत सीमित संख्या में नई ट्रेनों की घोषणा होगी।

इसके अलावा अतिरिक्त फंड जुटाने के लिए कुछ ट्रेनों की ब्रैंडिंग भी की जा सकती है। प्रस्ताव के अनुसार इन ट्रेनों पर कुछ लोकप्रिय ब्रैंडों के विज्ञापन लगे होंगे। इनका नाम भी कोका कोला एक्सप्रेस या हल्दीराम एक्सप्रेस आदि किया जा सकता है। 

इसके अलावा रेल बजट में कुछ लोकप्रिय मार्गों पर दूसरी श्रेणी के कोचों के साथ कुछ अनारक्षित ट्रेनों जैसे ‘जन साधारण एक्सप्रेस’ आदि की घोषणा हो सकती है। आम आदमी को सस्ती यात्रा के लिए इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया जा सकता है। रेल बजट संसद में 26 फरवरी को पेश किया जाएगा। रेल बजट 2015-16 में करीब 20 ट्रेनों के सेट के अधिग्रहण का भी प्रस्ताव किया जा सकता है। ये ट्रेनें लोकप्रिय राजधानी व शताब्दी के मार्गों पर चलाई जाएंगी।

बिहार में विधानसभा चुनाव के मद्देनजर वहां के लिए ट्रेनों की घोषणा हो सकती है। इसके अलावा पूर्वोत्तर के लिए भी नई ट्रेनों की घोषणा हो सकती है। माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश, ओडिशा, बंगाल व गुजरात जैसे राज्यों के लिए नई ट्रेनों की घोषणा के साथ क्षेत्रीय संतुलन स्थापित करने का प्रयास किया जाएगा। रेल बजट में सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) के तहत व्यस्त स्टेशनों के पुन: विकास का भी प्रस्ताव किया जा सकता है

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About Pradeep Rajpoot

Pradeep Rajpoot is a social activist, businessman and editor in chief of Betwa Anchal weekly news paper.
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