दिनांक 18 December 2017 समय 1:05 AM
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अयोध्या में मंदिर के साथ मस्जिद बनाने का फॉर्म्युला

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Ayodhya a665 साल से विवादित इस मसले के हल के लिए दोनों पक्ष एक फॉर्म्युले के साथ आए हैं, जिसके अनुसार 70 एकड़ के इस विवादित परिसर में मंदिर और मस्जिद दोनों बनाए जाएं और उन्हें एक 100 फीट ऊंची दीवार से बांट दिया जाए।

इस मामले में मुसलमानों की तरफ से सबसे बुजुर्ग वादी हाशिम अंसारी और अखाड़ा परिषद के मुखिया महंत ज्ञान दास ने सोमवार को इस प्रस्ताव पर चर्चा करने के लिए हनुमान गढ़ी में मुलाकात की। इस केस में हिंदुओं का वादी निर्मोही अखाड़ा है, जो कि अखाड़ा परिषद के अन्तर्गत ही आता है। अंसारी और दास ने कहा कि इस पूरी बातचीत में विश्व हिंदू परिषद को शामिल नहीं किया जाएगा

महंत ज्ञान दास ने कहा, ‘हमने अपने प्रस्ताव को लेकर लगभग सारी हिंदू प्रतिष्ठानों और मुख्य आध्यात्मिक गुरुओं से चर्चा की है। इस फॉर्म्युले पर सभी सहमत दिख रहे हैं। जल्द ही हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे और अपना प्रस्ताव उनके सामने रखेंगे। हम इस विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के लिए उनका सहयोग चाहते हैं।’ उन्होंने कहा, ‘वीएचपी इस प्रक्रिया का हिस्सा नहीं है, क्योंकि इसके नेता कभी भी राम मंदिर बनाना ही नहीं चाहते थे, उनका मकसद सिर्फ सांप्रदायिक तनाव पैदा करना है।’

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दास ने कहा, ‘हम चाहते हैं कि विवादित भूमि पर राम मंदिर और मस्जिद, दोनों बनें लेकिन बाद में कोई विवाद न हो इसलिए दोनों के बीच एक 100 फीट से ऊंची दीवार बनाई जाए। हम बातचीत के अंतिम दौर में हैं और जैसे ही अंतिम मसौदा तैयार हो जाता है हम इसे सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘हम ऐसे किसी भी कार्य के पक्ष में नहीं है जिससे हमारे मुस्लिम भाइयों को लगे कि वे हारे हुए हैं। इसलिए हम वीएचपी और बीजेपी के इस रुख की कड़ी निंदा करते हैं कि मस्जिद को अयोध्या की पंचकोशी परिक्रमा की सीमा के बाहर बनाया जाए। हमें मुट्ठी भर वीएचपी नेताओं की कोई परवाह नहीं है। हम सिर्फ भारत के नागरिकों की परवाह करते हैं।’

a5 m1ऑल इंडिया बाबरी मस्जिद ऐक्शन कमिटी के कन्वेनर जफरयाब जिलानी ने कहा कि उन्हें अंसारी और अदालत में उनके रुख को लेकर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा, ‘उनके और हमारे बीच जो चर्चा हुई है उसके आधार पर मैं यह कह सकता हूं कि जो अंसारी का रुख है वही भारत के सारे मुसलमानों का भी है। यह विश्वास करने का कोई कारण ही नहीं है कि वह अपने रुख से पलट जाएंगे।’

हालांकि यह केस अभी सुप्रीम कोर्ट में है, लेकिन इस केस से जुड़ी विभिन्न पार्टियां कोर्ट से बाहर समझौते के रास्ते भी तलाश रही हैं। अयोध्या विवाद 1950 से ही जारी है। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मसले पर 30 सितंबर 2010 को अपना फैसला सुनाया था। अपने फैसले में कोर्ट ने विवादित स्थल को भगवान राम का जन्मस्थल बताया था और विवादित परिसर का दो-तिहाई हिस्सा हिंदू पक्षकारों को देकर बाकी का एक-तिहाई हिस्सा मुस्लिम पक्षकारों को दे दिया था।

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About Pradeep Rajpoot

Pradeep Rajpoot is a social activist, businessman and editor in chief of Betwa Anchal weekly news paper.
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