दिनांक 16 December 2018 समय 2:40 PM
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1971 War में पाकिस्तान के हो गए थे दो टुकड़े

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1971_Instrument_of_Surrender47 साल पहले आज के दिन यानी 3 दिसंबर 1971 को पकिस्तान ने भारत पर हमला कर दिया था , पाकिस्‍तान का मानना था कि भारतीय सेना बांग्‍लादेश की मांग कर रहे पूर्वी पाकिस्‍तान के लोगों की न केवल मदद कर रही है, बल्कि उन्‍हें युद्ध के लिए सैन्‍य प्रशिक्षण भी दे रही है. इसी खुन्‍नस के चलते पाकिस्‍तान ने 3 दिसंबर 1971 को भारत पर हवाई हमला कर दिया था इस हमले में पकिस्तान ने भारत के पी-35 राडार को नष्‍ट करने में सफलता हासिल कर ली थी .पाकिस्‍तान ने इस  युद्ध  को ‘ऑपरेशन चंगेज खान’ का नाम दिया था 3 दिसंबर 1971 की शाम 5:30 बजे पाकिस्‍तान सरकार ने इस्‍लामाबाद से पाक वायु सेना को हमले के आदेश जारी कर दिए पाकिस्‍तान के लड़ाकू विमानों ने पहला हमला अमृतसर के एयरबेस पर किया. इसके बाद,  पठानकोट, श्रीनगर, अवंतीपुर पर हवाई हमला किया गया. इन हमलों के ठीक  बाद फरीदकोट पर पाकिस्‍तानी लड़ाकू विमानों ने बम बरसाने शुरू कर दिए उस समय  भारत की तत्‍कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी कोलकाता में एक जनसभा को संबोधित कर रही थीं. उनका संबोधन जारी ही था, तभी कुछ अधिकारी तेजी से दौड़ते हुए इंदिरा गांधी के पास पहुंचे. कोई कुछ समझ पाता, इससे पहले अधिकारियों ने एक पर्ची इंदिरा गांधी को धमाई और कान में कुछ बुदबुदाने लगे. अधिकारियों के हर वाक्‍य के साथ इंदिरा गांधी के चेहरे पर तनाव बढ़ता जा रहा है. दरअसल, इन अधिकारियों ने इंदिरा गांधी को पाकिस्‍तान द्वारा शुरू किए गए हवाई हमलों के बाबत जानकारी दी थी. इंदिरा गांधी ने जनसभा को बीच में छोड़कर दिल्‍ली वापस जाने का फैसला किया. सैन्‍य अधिकारियों से हालात की  जानकारी लेने के बाद इंदिरा गांधी अपने विशेष विमान में दिल्‍ली के लिए रवाना हो गईं. जब-तब उनका विमान दिल्‍ली पहुंचता, तब-तक दिल्‍ली में पूरी तरह से ब्‍लैक आउट लागू हो चुका था. जिस बजह से  इंदिरा गांधी का विमान दिल्‍ली में लैंड नहीं हो सका, उनके विमान को लखनऊ के लिए डाइवर्ट कर दिया गया. किसी तरह रात्रि करीब 11 बजे इंदिरा दिल्‍ली पहुंची. दिल्‍ली पहुंचते ही उन्‍होंने सैन्‍य अधिकारियों से तात्‍कालिक स्थिति का जायजा लिया और कैबिनेट की बैठक की. जिसके बाद इंदिरा गांधी ने ऑल इंडिया रेडियो के जरिए देश के नाम अपना संदेश जारी कर पाकिस्‍तान के साथ युद्ध का ऐलान कर दिया.पाकिस्‍तान को जवाब देने के लिए भारतीय सेना पूरी तरह से अपनी कमर कस चुकी थी. रात्रि 9 बजे भारतीय सेना के लड़ाकू विमानों ने पाकिस्‍तान की तरफ रुख किया. भारतीय सेना ने देखते ही देखते पाकिस्‍तान के 7 एयरबेस को पूरी तरह से तबाह कर दिया. भारतीय सेना ने पाकिस्‍तान के जिन एयरबेस को तबाह किया, उनमें मुरीद, मिंयावाली, सरगोथा, चांदेर, त्रिसालेवाला, रफीकी और मसरुर एयरबेस शामिल हैं. पाकिस्‍तान को तनिक भी अंदाजा नहीं था कि भारतीय वायु सेना इतने कम समय में इतनी सटीक कार्रवाई कर सकती है. भारतीय वायु सेना ने अपनी इस कार्रवाई में पाकिस्‍तान के एयरबेस तो तबाह हुए ही थे, साथ ही दुश्‍मन सेना के मनोबल पर भी बड़ी चोट की गई थी.भारतीय सेना की  अचूक कार्रवाई से पाकिस्‍तान बुरी तरह से झल्‍ला चुका था. पाकिस्‍तान ने आनन-फानन दूसरे हमले की साजिश रची. साजिश के तहत पाकिस्‍तानी वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने अंबाला, आगरा, हरवाला, अमृतसर, जोधपुर, जैसलमेर, बीकानेर और उत्तरलाई पर बम बरसाने शुरू कर दिए. हालांकि भारतीय वायुसेना के युद्धकौशल और जांबाजी का नतीजा था कि पाकिस्‍तानी वायु सेना उनके साथ ज्‍यादा देर तक टिक नहीं सकी. इसी का नतीजा था कि भारतीय सेना ने इस युद्ध में पाकिस्‍तान के कुल 94 विमानों को मार गिराया था. इतना ही नहीं, भारतीय वायु सेना की जबरदस्‍त कार्रवाई के चलते पाकिस्‍तानी सेना अपने एक भी षड्यंत्र को अंजाम तक नहीं पहुंचा सकी.4 दिसंबर को आईएनएस विक्रांत में तैनात सी-हॉक लड़ाकू विमानों ने चटगांव एवं कॉक्स बाज़ार सहित पूर्वी पाक के कई तटवर्त्ती नगरों व कस्बों पर हमला बोल दिया. इस हमले से झल्‍लाए पाकिस्‍तान ने बदला लेने के लिए पीएनएस ग़ाज़ी को भेजा. जिसे विशाखापट्टनम के निकट भारतीय नौसेना ने नेस्‍तेनाबूत कर दिया.पश्चिमी कमान ने 4-5 दिसंबर 1971 की रात्रि कराची बंदरगाह पर हमला बोल दिया. इस हमले में पाकिस्‍तान नौसेना का पीएनएस खायबर और पीएनएस मुहाफिज को जलमग्‍न कर पीएनएस शाहजहां को बुरी तरह से क्षतिग्रस्‍त कर दिया 13 दिन में  पाकिस्‍तान की पूरी सेना ने भारत के सामने घुटने टेक दिए . 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी लेफ्टिनेंट जनरल एएके नियाज़ी ने अपने 93 हजार पाक सैनिकों के साथ भारतीय सेना के लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के सामने समर्पण कर दिया.

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About Pradeep Rajpoot

Pradeep Rajpoot is a social activist, businessman and editor in chief of Betwa Anchal weekly news paper.
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