दिनांक 25 September 2018 समय 8:57 PM
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स्विस HSBC में खाता रखने वालों का खेल खत्म

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black_moneyमुंबई

एचएसबीसी स्विट्जरलैंड में गुप्त बैंक अकाउंट्स रखने वाले भारतीयों के लिए इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के साथ चूहे-बिल्ली का खेल अब खत्म हो सकता है। हफ्ताभर पहले ऐसे कई रईस भारतीयों को ब्रिटिश बैंक से ईमेल मिली, जिसमें उन्हें स्विट्जरलैंड में किसी शख्स के बारे में बताने के लिए कहा गया है, जिससे वहां की सरकार भारतीय अथॉरिटीज के साथ इन बैंक खातों की जानकारी शेयर करने के लिए सहमति ले सके। ईमेल एचएसबीसी के रिलेशनशिप मैनेजर की ओर से आई है। इसमें यह भी कहा गया है कि अगर क्लाइंट तय समय में इसके लिए सहमति नहीं देता है तो स्विस सरकार अपने ऑफिशल गजट में ये सूचनाएं छाप देगी। यह मामला उन बैंक खातों से जुड़ा है, जो 1 जनवरी 2011 को या उसके बाद ऑपरेशनल थे।

सूचनाएं किस तरह की हैं और सहमति पत्र का एक प्रारूप जल्द ही भारत में एचएसबीसी के क्लाइंट्स को स्विट्जरलैंड में थर्ड पार्टी के जरिये मिलेगा। खाताधारक के एक बार इस पर दस्तखत करने और उसे सीधे स्विस सरकार को ईमेल करने के बाद बैंक खाते से जुड़ी सारी सूचनाएं भारतीय अथॉरिटीज के साथ शेयर की जा सकेंगी। इसमें बैंक खाते में पड़ी रकम, पिछले लेनदेन और लाभा पाने वालों की जानकारी होगी।

इसमें थर्ड पार्टी को स्विस नागरिक या लॉ फर्म जैसी एंटिटी हो सकती है। स्विस सरकार ने इन लोगों को इसलिए जोड़ा है क्योंकि कानूनन वह किसी विदेशी के साथ इस तरह की जानकारी शेयर नहीं कर सकती। इस मामले से वाकिफ एक सीनियर टैक्स सलाहकार ने बताया, ‘स्विट्जरलैंड इन खाताधारकों को अपनी सहमति देने का एक मौका देना चाहता है। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो सूचनाएं ऑफिशल गजट में छपेंगी और उसके बाद भारत सरकार उन्हें हासिल कर सकती है। एचएसबीसी की ईमेल में एक लेटर का जिक्र किया गया है, जो उसे स्विट्जरलैंड की सरकार से मिला है।’ इस मामले में एचएसबीसी को इकनॉमिक टाइम्स ने ईमेल भेजकर कुछ सवाल पूछे थे, लेकिन अखबार के प्रेस में जाने तक उनका जवाब नहीं मिला था।

इससे उन लोगों का पक्ष कमजोर पड़ जाएगा, जो अब तक यह कहते आए हैं कि इनकम टैक्स डिपार्टमेंट चोरी किए गए डेटा के आधार पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकता। एचएसबीसी स्विट्जरलैंड में बैंक खाते रखने वाले भारतीयों की जानकारी फ्रांस सरकार से भारत को मिली थी। फ्रांस सरकार को एचएसबीसी जिनीवा के एक पूर्व कर्मचारी ने भारत सहित कई देशों के नागरिकों के खुफिया बैंक खातों की जानकारी दी थी। ये डेटा 11 फ्लॉपी डिस्क में थे।

जिन लोगों के नाम इस लिस्ट में थे, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने उनसे 2013 में एचएसबीसी के दो इन-हाउस वकीलों को दो पेज के लेटर में बैंक अकाउंट्स की जानकारी और स्विस सीक्रेसी लॉ के तहत राइट्स सरेंडर करने के लिए कहा था। हालांकि ऐसा बहुत कम लोगों ने किया। बाद में कई खाताधारकों ने बैंक को कहा कि वह ये जानकारियां इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को न दे। उन्होंने कहा था कि उनसे दबाव में इसके लिए दस्तखत कराए गए थे। हालांकि इस बार पहल स्विस अथॉरिटीज की ओर से हुई है। इसलिए खाताधारक सहमति देने से इनकार नहीं कर सकते।

हालांकि इनमें से ज्यादातर खाता व्यक्तिगत नहीं हैं। ये खाते कंपनियों के नाम पर हैं, जिन पर पनामा जैसे टैक्स हेवेन बेस्ड डिस्क्रिशनरी ट्रस्ट्स का मालिकाना हक है। हालांकि इस मामले में इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने भारतीय इंडिविजुअल टैक्सपेयर्स और यहां तक कि पहले प्रवासी रह चुके भारतीयों को घेरा था, जिनके नाम ट्रस्ट्स के बेनेफिशियरी के तौर पर दर्ज हैं। इस मामले में दो चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने कहा कि ऐसे कई लोगों ने जनवरी 2011 से पहले खाते बंद कर दिए थे। उन्होंने बताया, ‘यह पैसा दुबई या सिंगापुर या कहीं और शिफ्ट कर दिया गया था। इनकम टैक्स डिपार्टमेंट इन लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर सकता। यह पता नहीं है कि नए ब्लैक मनी बिल में छिपाए गए धन के लिए एक बार को जो मोहलत दी गई है, उसका फायदा इन लोगों को मिलेगा या नहीं?

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About Pradeep Rajpoot

Pradeep Rajpoot is a social activist, businessman and editor in chief of Betwa Anchal weekly news paper.
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