दिनांक 18 December 2017 समय 1:13 AM
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सुप्रीम कोर्ट ने जल्लीकट्टू खेल पर फिर रोक लगाई

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betwaanchal news

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नई दिल्ली/चेन्नई. पोंगल के दौरान सांड़ या बैलों को काबू करने वाले खेल (जल्लीकट्टू) पर सुप्रीम कोर्ट ने फिर रोक लगा दी है। इसके पहले मुख्यमंत्री जयललिता की मांग पर मोदी सरकार ने इसे हरी झंडी दी थी। तमिलनाडु में इस खेल पर 2011 से बैन था।

क्यों लगा था जल्लीकट्टू पर बैन…
– तमिलनाडु के परंपरागत खेल में सांड़ या बैलों के बीमार होने और क्रूरता के कई मामले सामने आए थे।
– 2011 में पर्यावरण मंत्रालय ने जल्लीकट्टू पर रोक लगाई थी। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बैन को सही ठहराया था।
– जल्लीकट्टू में सांड़ को काबू करने वाले विनर को लाखों रुपए का कैश प्राइज दिया जाता है। इसे देसी बुल फाइट भी कहते हैं।
– तमिलनाडु समेत साउथ इंडिया के कई हिस्सो में लंबे समय से विवादों में रहे इस खेल पर 5 साल से रोक लगी थी।
– बता दें कि 13 जनवरी से साउथ इंडिया में पोंगल की शुरुआत होनी है। इसी दौरान ये खेल होता है।
– तमिलनाडु में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं और इसे देखते हुए सरकार का ये फ़ैसला अहम माना जा रहा था।
– एनीमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया ने जल्लीकुट्टी को मंजूरी देने वाले सरकार के फैसले को चुनौती देने की बात कही थी।
क्या था मंत्रालय के नोटिफिकेशन में?
– पर्यावरण मंत्रालय ने 8 जनवरी को ही तमिलनाडु में जल्लीकट्टू, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा, केरल और गुजरात में बैलगाड़ी दौड़ को मंजूरी दी थी।
– सरकार के नोटिफिकेशन में साफ कहा गया था कि इन परंपरागत खेलों के दौरान एनीमल्स के साथ क्रूरता ना हो और सिक्युरिटी के पुख्ता इंतजाम हों।
– जल्लीकट्टू के दौरान सांड या बैलों को 15 मीटर के दायरे के अंदर ही काबू करना होगा।
– बैलगाड़ी दौड़ एक खास तरह के ट्रैक पर कराई जाए, जो दो किलोमीटर से ज़्यादा लंबा ना हो।
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About Pradeep Rajpoot

Pradeep Rajpoot is a social activist, businessman and editor in chief of Betwa Anchal weekly news paper.
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