दिनांक 19 October 2017 समय 3:24 AM
Breaking News

योगी, जिन्होंने खड़ी कर दी सुपर इंडस्ट्री-

ShareGoogle+FacebookLinkedInTwitterStumbleUponEmail

yogआपने पॉप्युलर किताब ‘द मॉन्क हू सोल्ड हिज़ फरारी’ के बारे में जरूर सुना होगा। इसमें एक सफल कारोबारी अपनी करोड़ों की प्रॉपर्टी और फरारी कार को त्यागकर साधु बन जाता है। इससे बिल्कुल उलट यह कहानी उस योगी की है, जिसकी यात्रा शुरू तो हुई योग से लेकिन उसने खड़ी कर दी 2,000 करोड़ की एक खास इंडस्ट्री। हम बात कर रहे हैं बाबा रामदेव की।

यह कहानी शुरू होती है हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के अलीपुर गांव से, जहां 10 साल की उम्र का एक लड़का रामकृष्ण यादव आम लोगों से अलग था। उसे न हमउम्र लड़कों के साथ रहने का शौक था, न ही बच्चों वाले खेल खेलने का। उसका मन तो गांव में गाहे-बगाहे लगने वाले योग शिविर में लगता था। इन योग शिविरों में रामकृष्ण की उम्र के बच्चे कम ही आते थे। ऐसे में उसकी दोस्ती अपनी उम्र से बड़े लोगों से होने लगी।

रामकृष्ण को पढ़ाई-लिखाई अच्छी तो लगती थी, लेकिन योग के लिए उसकी ललक बढ़ने लगी। फिर एक दिन उसने सब कुछ छोड़ कर ऋषिकेश जाने की ठान ली। एक सुबह 4 बजे अपने एक दोस्त की मदद से रामकृष्ण ने रामदेव बनने की यात्रा शुरू की। ऋषिकेश के एक आश्रम में रामदेव ने योग सीखना शुरू किया और धार्मिक शिक्षा भी ली। इसी दौरान वह स्वदेशी आंदोलन की तरफ भी आकर्षित हुए। योग सीखने का काम धीरे-धीरे योग सिखाने तक पहुंचा और उन्होंने हरियाणा के कुछ गांवों में ही योग शिविर लगा कर योग सिखाना शुरू किया।

बाबा से ब्रैंड तक

बाबा रामदेव को लोग दूर-दराज तब जानने लगे, जब एक धार्मिक टीवी चैनल ने उन्हें सुबह योग सिखाने के एक प्रोग्राम में फीचर करना शुरू किया। धीरे-धीरे बाबा रामदेव सुबह घर-घर पहुंचने लगे और योग के पीछे एक बड़ा ब्रैंड खड़ा होना शुरू हुआ। जैसे-जैसे बाबा रामदेव का योग लोगों के जीवन को बदलने का काम करने लगा, वैसे-वैसे उनकी साख बढ़ने लगी। अब तक बाबा रामदेव लोगों तक योग को पहुंचा रहे थे, लेकिन स्वदेशी का मिशन अभी बाकी था। बाबा रामदेव ने अपनी बढ़ती साख के साथ ही लोगों तक स्वदेशी चीजों को पहुंचाने का काम शुरू किया।

यह सन 2000 की बात है, जब आयुर्वेदिक दवाओं से लेकर फूड प्रॉडक्ट्स तक को लोगों तक पहुंचाने के बारे में प्लानिंग बनने लगी। ऐसे वक्त में बाबा रामदेव के सहयोगी आचार्य बालकृष्ण ने योग फार्मेसी की कमान संभाली। बाबा रामदेव के मुताबिक, इस उपक्रम की शुरुआत उनके चाहने वालों के दिए डोनेशन से हुई। उनका यहां तक दावा है कि अब भी पतंजलि योग संस्थान के सारे प्रॉडक्ट्स ‘ज्यादा क्वॉलिटी, कम मुनाफे’ के फंडे पर बेचे जाते हैं।

योग के जरिए मार्केट में एंट्री

टीवी पर आने की वजह से रामदेव घर-घर पहुंचे और साथ ही पहुंचे रामदेव के आश्रम के बने हुए प्रॉडक्ट्स। इन प्रॉडक्ट्स की पहुंच को देश के भीतरी कोनों तक पहुंचाने का काम बाबा रामदेव के उन वॉलनटिअर्स ने किया, जो अब तक लोगों को मुफ्त में योग की क्लास देते थे। इन योगियों के नेटवर्क ने धीरे-धीरे डिस्ट्रिब्यूशन चैनल का रूप लिया। देखते ही देखते बाबा रामदेव के प्रॉडक्ट्स हर उस जगह पहुंचने लगे, जहां बड़े ब्रैंड पहुंचने का इंतजार कर रहे थे। बाबा रामदेव के फूड प्रॉडक्ट्स के साथ ही पतंजलि फार्मेसी की आयुर्वेदिक दवाओं ने भी छोटे शहरों का रुख किया।

मरीजों को कम पैसे में ओपीडी की सुविधा पतंजलि योग संस्थान के नियुक्त आयुर्वेदिक डॉक्टरों ने देनी शुरू कर दीं। योग ने बाबा रामदेव के लिए मार्केट में वह जगह बनानी शुरू कर दी, जो बड़े ब्रैंड करोड़ों मार्केटिंग में खर्च करने के बाद भी नहीं कर पाते।

तगड़ी डिमांड ने खड़ा किया साम्राज्य

प्रॉड्क्टस की अच्छी क्वॉलिटी कहें या बाबा रामदेव ब्रैंड की साख, 2005 तक मार्केट में पतंजलि योग संस्थान के प्रॉडक्ट्स की डिमांड लगातार बढ़ने लगी। बढ़ती डिमांड ने स्मॉल स्केल पर शुरू की गई इंडस्ट्री को फलने-फूलने का आधार दिया। उत्तराखंड में सरकार की तरफ से मिली एकड़ों जमीन पर पतंजलि योग संस्थान ने 3 सेंटर बनाए। इसका फायदा जितना पतंजलि योग संस्थान को मिला, उतना ही आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों को भी।

एक अनुमान के मुताबिक, बाबा रामदेव के सभी संस्थानों में आसपास के तकरीबन 20 हजार लोग स्थायी और अस्थायी रूप से काम कर रहे हैं। उनके बिजनस ने रफ्तार पकड़नी शुरू दिया और दुनिया भर की बड़ी कंपनियों के साथ रेस लगाने के लिए इसे प्रफेशनल स्ट्रक्चर की जरूरत हुई।

चढ़ रहे हैं करोड़ों की सीढ़ियां

मार्केट ऐनालिस्ट्स ने इस साल बाबा की इंडस्ट्री को तकरीबन 2,000 करोड़ रुपये के बराबर आंका है। गौर करने वाली बात यह है कि 2013-14 में इसका टर्नओवर 1,200 करोड़ रुपये आंका गया था, जो इससे एक साल पहले तक मात्र 450 करोड़ रुपये था। ये आंकड़े इस बात की ओर साफ इशारा करते हैं कि बाबा का साम्राज्य कन्जयूमर गुड्स के मामले में जमे-जमाए ब्रैंड्स इमामी (साल 2013-14 में 1,700 करोड़ रुपये टर्नओवर) और मैरिको (साल 2013-14 में 4,000 करोड़ रुपये टर्नओवर) को टक्कर देता नजर आ रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि बाबा रामदेव के हिसाब से अगले 2 साल में वह 5,000 करोड़ का आंकड़ा पार कर लेंगे।

देसी इंडस्ट्री का प्रफेशनल सेटअप

सदी के दूसरे दशक की शुरुआत तक बाबा रामदेव की इंडस्ट्री ने पूरी तरह प्रफेशनल रूप अख्तियार कर लिया था। इनके खास फीचर्स में शुमार है :

1. पूरी तरह ऑटोमैटिक मशीनें : बाबा रामदेव की हर्बल इंडस्ट्री को चलाने के लिए जिन मशीनों को लगाया गया, उनसे इंसानी दखल को कम-से-कम रखने की कोशिश की गई। करोड़ों रुपये की मशीनों के सेटअप में काम करने वाले प्रॉडक्ट की पैकेजिंग तक ही सीमित हैं।

2. भरा-पूरा विदेशी बाजार : पतंजलि इंडस्ट्री ने देश के भीतर ही नहीं, बाहर भी पांव पसारने शुरू कर दिए हैं। अनुमान के मुताबिक विदेशों में पतंजलि इंडस्ट्री का तकरीबन 200 करोड़ रुपये का कारोबार है। इसके लिए बाकायदा वाइस प्रेसिडेंट लेवल के अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।

3. प्रफेशनल एक्सपर्ट : पतंजलि इंडस्ट्री को चलाने के लिए पेशेवर लोगों की एक टीम है, जो प्रॉडक्शन मैनेज करने से लेकर मार्केटिंग तक का ख्याल रखती है।

‘मंत्री’ के जिम्मे हर्बल गोदाम

पतंजलि हर्बल इंडस्ट्री की सबसे बड़ी पूंजी उनकी आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां हैं। इन्हें रखने के लिए एक सेंट्रल गोदाम बनाया गया है, जिसकी जिम्मेदार मंत्री पर है। मंत्री एक शख्स का नाम है। पूरी पतंजलि इंडस्ट्री और खुद बाबा रामदेव उन्हें मंत्री के नाम से बुलाते हैं। इनके डायरेक्शन में ही इस गोदाम का रखरखाव होता है। उनकी इजाजत के बिना इस गोदाम में परिंदा भी पर नहीं मार सकता है।

मोटे तौर पर बाबा रामदेव की इंडस्ट्री को दो भागों में बांट कर देख सकते हैं। एक पतंजलि फूड ऐंड हर्बल पार्क और दूसरी दिव्य फार्मेसी। हालांकि मैनेजमेंट और स्ट्रैटिजी के लिहाज से एक्सपर्ट दोनों ही जगह अपनी सलाह देते हैं। इन एक्सपर्ट्स में खास हैं :

रामभरत यादव : बाबा रामदेव के छोटे भाई रामभरत। पतंजलि फूड ऐंड हर्बल पार्क हो या दिव्य फार्मेसी, हर तरह के प्रशासनिक कामों और संचालन के लिए जिम्मेदार हैं। इनकी इजाजत के बिना पतंजलि इंडस्ट्री में कुछ भी नहीं हो सकता।

आचार्य बालकृष्ण : दिव्य फार्मेसी की पूरी जिम्मेदारी इनके ऊपर है। यहां का सारा कामकाज इनके दिशानिर्देश में ही चलता है। दिव्य फार्मेंसी में किसी भी दवा से लेकर नया सेटअप लगाने तक के लिए आचार्य बालकृष्ण की जरूरत होती है। इनका रैंक सीईओ लेवल का है।

स्वामी मुक्तानंद : इनका काम हर लेवल पर दिव्य फार्मेसी के कामों को कोऑर्डिनेट करना और आचार्य बालकृष्ण के साथ मिलकर कामकाज देखना है।

दीपक सिंघल (चीफ स्ट्रैटिजिक ऑफिसर) : इनका काम पतंजलि इंडस्ट्री के रेवेन्यू से जुड़े मामलों पर पैनी नजर रखना और ह्यूमन रिसोर्स को मैनेज करना है। हर तरह की बिजनेस स्ट्रैटिजी बनाने में इनकी सलाह सबसे अहम मानी जाती है।

राकेश शर्मा (सीनियर प्रेजिडेंट) : पतंजलि प्रॉडक्ट्स की पब्लिसिटी और प्रमोशन की जिम्मेदारी इन पर है। किस चैनल और मीडियम पर कितना प्रचार होगा, इसकी कमान यह तय करते हैं।

रविंद्र चौधरी (सीईओ, फूड पार्क) : दुनिया के बड़े ब्रैंड्स के एफएमसीजी प्रॉडक्ट्स की टक्कर में पतंजलि के प्रॉडक्ट्स को खड़ा रखना इनकी जिम्मेदारी है। डिस्ट्रिब्यूशन चेन पर तगड़ी नजर और प्रॉडक्ट्स के नफा-नुकसान को कंट्रोल में रखना इनके जिम्मे है। फिलहाल पतंजलि इंडस्ट्री में इन्हें काफी प्रभावशाली शख्स के तौर पर जाना जाता है।

ए. के. सिंह : विदेशों में पतंजलि प्रॉडक्ट्स के पैर पसारने की जिम्मेदारी इनके ऊपर है। सामान को विदेशी धरती पर किस तरह से बेचा और पेश किया जाए, इसकी रणनीति ये तैयार करते हैं।

सी. पी. नागपाल (वीपी, फूड्स) : इनका काम है प्रॉडक्शन पर नजर रखना। प्रॉडक्शन कंट्रोल का काम इनके जिम्मे है।

निमय घोष (डीजीएम सेंट्रल लैब) : हर प्रॉडक्ट की क्वॉलिटी पर पैनी नजर रखना इनकी जिम्मेदारी है। देश भर की कई बड़ी लैब्स में काम का लंबा अनुभव इनके पास है

ShareGoogle+FacebookLinkedInTwitterStumbleUponEmail

comments

About Pradeep Rajpoot

Pradeep Rajpoot is a social activist, businessman and editor in chief of Betwa Anchal weekly news paper.
Scroll To Top