दिनांक 22 October 2018 समय 4:01 PM
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ममता–मोदी मेल-मिलाप से कांग्रेस परेशान-

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pm-modi-kolkatamamta-banrनई दिल्ली 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच मेल-मिलाप से कांग्रेस परेशान नजर आ रही है।  पार्टी की परेशानी का सबब यह है कि उसने ममता बनर्जी को तुरंत चेतावनी भी दे डाली। हालांकि, उसने दीदी के सीधे-सीधे कुछ कहने की जगह भूमि अधिग्रहण बिल पर विपक्ष की एकजुटता की दुहाई दी।

कांग्रेस पार्टी के मीडिया डिपार्टमेंट के हेड रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘केंद्र से ज्यादा से ज्यादा लाभ लेने के लिए सभी राज्यों में होड़ लगी रहती है। हम ममता बनर्जी या उनकी पार्टी टीएमसी को पश्चिम बंगाल का सर्वोत्तम हित तय करने से नहीं रोक रहे। हालांकि, हम ममता बनर्जी को चेतावनी देना चाहते हैं कि मोदी का इस्तेमाल करो और छोड़ दो की राजनीति का सिद्ध ट्रैक रेकॉर्ड है और वह टीएमसी को भी तब ठेंगा दिखा देंगे, जब उनका मकसद पूरा हो जाएगा।’दरअसल, बतौर पीएम पश्चिम बंगाल के पहले दौरे पर नरेंद्र मोदी के साथ ममता बनर्जी का अचानक मित्रवत व्यवहार ने ना सिर्फ कांग्रेस को बल्कि मोदी के सभी विरोधियों को सकते में डाल दिया है। कांग्रेस की अगुवाई में विपक्षी खेमा ममता के साथ नई केमिस्ट्री को मोदी की एक चाल के तौर पर देख रहा है, जिसके तहत वह (पीएम मोदी) विभिन्न मुद्दों पर विपक्ष की एकजुटता को तोड़ने में जुटे हैं। कांग्रेस इसलिए भी बेचैन हो उठी है क्योंकि उसे लग रहा है कि अगर उसके खेमे की पार्टियां ऐसे ही मोदी की मुरीद होती गईं तो भूमि अधिग्रहण बिल, जीएसटी बिल जैसे अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने के उसके अभियान को जबरदस्त झटका लगेगा।

इधर, बीजेपी और मोदी ने ममता की मजबूरियों को भांप लिया है। आर्थिक तंगी से जूझ रहे ममता के राज्य पश्चिम बंगाल को केंद्र के मदद की दरकार है। यही वजह है कि कभी मोदी के खिलाफ आग उगलने वाली ममता ने मोदी के साथ ही सार्वजनिक तौर पर मंच साझा किया। हालांकि, विपक्ष को यह भी लग रहा है कि ममता बनर्जी की बीजेपी के साथ संबंध सुधारने की कोशिश बेकार जाएगी, क्योंकि बीजेपी विधानसभा चुनाव से पहले पश्चिम बंगाल में खुद की स्थिति मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। इससे दोनों के बीच टकराव की स्थिति आगे भी बनेगी ही। इधर, ममता बनर्जी ने सिंगूर घटना के बाद भूमि अधिग्रहण के मामले पर जो रवैया अब तक अपना रखा है, उसे आगे बरकरार रखने के लिए लैंड बिल पर नरमी बरतना उनके लिए संभव नहीं होगा।

खैर, विपक्ष के साथ-साथ राजनीतिक विश्लेषकों की भी नजर इस बात पर टिकी है कि सोमवार से शुरू हो रहे बजट सत्र के अंतिम सप्ताह के दौरान संसद में टीएमसी के व्यवहार में क्या बदलाव आता है

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About Pradeep Rajpoot

Pradeep Rajpoot is a social activist, businessman and editor in chief of Betwa Anchal weekly news paper.
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