दिनांक 14 November 2018 समय 4:40 PM
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भोपाल-मरना है तो प्लेन ऐक्सिडेंट में मरें, ट्रेन में नहीं

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railwayभोपाल
रेलवे हर साल यात्री किराये और माल भाड़े में बढ़ोत्तरी तो करता रहता है लेकिन आप यह जानकर शॉक्ड होंगे कि रेलवे दुर्घटना में पीड़ितों को दिए जाने वाले मुआवजे में 19 साल से कोई बदलाव नहीं किया गया है।

यह जानकरी नीमच के रहने वाले आरटीआई ऐक्टिविस्ट चंद्रशेखर गौड़ द्वारा दायर की गई आरटीआई से मिली। आरटीआई के जवाब से पता चला है कि रेलवे ने साल 1997 के बाद से ही रेलवे पीड़ितों के लिए मुआवजे कि राशि चार लाख रुपये पर फिक्स कर रखी है। रेलवे द्वारा हर साल बजट पेश किया जाता है समय-समय पर यात्री किराए और माल भाड़े में बढ़ोतरी भी की जाती हैं लेकिन दुर्घटना पीड़ितों के मुआवजे की राशि में 19 सालों से कोई भी बदलाव नहीं किया गया है।

गौड़ ने इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखकर मुआवजे की राशि में बदलाव कि मांग कर इसे इन्फ्लेशन से जोड़ने की मांग की है। वहीं रेलवे के उलट अभी हाल ही में केन्द्रीय कैबिनेट ने भारतीय एयरलाइंस से सफर करने वाले यात्रियों कि मुआवजा राशि में संशोधन को मंजूरी दी है। ऐसे में दुर्घटना में मृत्यु हो जाने पर पीड़ित के परिवार को 96 लाख का मुआवजा मिलेगा।

गौड़ ने अपनी चिट्ठी में सुझाया है कि सरकार इस मामले में यात्रियों से कुछ बीमा प्रीमियम तय कर मुआवजे राशि की गणना के लिए मोटर ऐक्सिडेंटल क्लेम ट्रिब्यूनल की तरह का ही कोई तरीका ईजाद किया जाना चाहिए।

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About Pradeep Rajpoot

Pradeep Rajpoot is a social activist, businessman and editor in chief of Betwa Anchal weekly news paper.
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