दिनांक 21 July 2018 समय 10:57 PM
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ग्वालियर–बिगड़ा ट्रैफिक मैनेजमेंट: मुख्य चौराहों पर नहीं दिखती ट्रैफिक पुलिस

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32_1425769333ग्वालियर. व्यस्ततम बाजार और ट्रैफिक का लोड। रेंग-रेंग कर दोपहिया और चार पहिया वाहन चलने को मजबूर। यह स्थिति है लश्कर के मुख्य चौराहों और तिराहों पर, जहां वाहन चालक कंफ्यूज हो जाते हैं कि गाड़ी ट्रैफिक से कैसे निकालें। गश्त का ताजिया चौराहा, छप्पर वाला पुल, फालका बाजार, पाटनकर बाजार और काॅर्मल काॅन्वेंट तिराहा, यहां सुबह हो या शाम, ट्रैफिक से जूझ कर ही निकलना पड़ता है। इन स्थानों पर ट्रैफिक पुलिस ड्यूटी करना तो दूर, खड़ी तक नहीं होती।

लश्कर क्षेत्र में ट्रैफिक का लोड जितना ज्यादा है, उतना ही कमजोर पुलिस का ट्रैफिक मैनेजमेंट है। हर बार की तरह पुलिस का कम फोर्स का बहाना रहता है, लेकिन शिंदे की छावनी, पड़ाव,फूलबाग,गोला का मंदिर, आकाशवाणी तिराहा, सिटी सेंटर क्षेत्र ऐसे हैं जहां चौड़ी सड़कों के बाद भी ट्रैफिक पुलिस खड़ी दिखती है। महीने में बहुत ही कम ऐसे दिन होते हैं, जब इन स्थानों पर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनती है।
इनके बिना परेशानी 
इंजीनियरिंग: ट्रैफिक इंजीनियरिंग से ट्रैफिक बेहतर हो सकता है। इसके लिए ननि और विकास प्राधिकरण जिम्मेदार हैं।
अवेयरनेस: जिला प्रशासन ट्रैफिक नियमों के साइन बोर्ड जगह-जगह लगवाए ताकि लोग अवेयर हों।
इंफोर्समेंट: मुख्य चौराहाें और सड़क पर ट्रैफिक पुलिस होना चाहिए। कई जगह यह नजर नहीं आती।
कहां कैसी दिक्कत
गश्त का ताजिया: 
यहां पाटनकर बाजार, राममंदिर रोड व नई सड़क की ओर से ट्रैफिक आता है। यहां जाम जैसी स्थिति बनती है। दुकानदारों का सामान और रोड किनारे खड़े वाहनों से ट्रैफिक बाधित होता है।
पाटनकर बाजार तिराहा: यहां ऊंट पुल की ओर से गश्त का ताजिया जाने वाले और फालका बाजार से दौलतगंज जाने वाले वाहन बीच चौराहे पर अटक-अटक कर निकलते हैं।
काॅन्वेंट स्कूल तिराहा: यह मार्ग पुलिस के नियमों में वन वे जरूर है,लेकिन तिराहे पर काॅर्मल कान्वेंट स्कूल की ओर से आने वाला ट्रैफिक दोनों ओर जाने से सीधे गुजरने वाले वाहनों की स्पीड थम जाती है। वन वे का पालन हो रहा है या नहीं यह देखने वाला कोई नहीं।
छप्पर वाला पुल: यहां गोलंबर के चारों ओर वाहन चालक कन्फ्यूजन में अपनी गाड़ी निकालते हैं। अधिकतर वाहन अपनी मर्जी से गुजरते हैं जिससे नियम से चलने वाले वाहनों को परेशानी होती है।
फोर्स बढ़ाने का प्रयास करेंगे 
लश्कर के क्षेत्रों में ट्रैफिक पुलिस की उपस्थिति कम रहती है। इस क्षेत्र के चौराहे-तिराहों पर फोर्स बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। प्रदेश में ट्रैफिक रेगुलेटरी अथॉरिटी नहीं है,जबकि अन्य महानगरों में यह प्रभावी काम करती है। सड़कों पर दुकानदारों का अतिक्रमण रहता है जिससे ट्रैफिक अव्यवस्थित होता है,यह नगर निगम का काम है।
एमके छारी, डीएसपी,ट्रैफिक पुलिस
जवान की उपस्थिति जरूरी, चालान हल नहीं 
सड़कें सिकुड़ती जा रही हैं और वाहनों की संख्या बढ़ रही है। जिले के विकास प्राधिकरण और निगम की शून्य ट्रैफिक इंजीनियरिंग के कारण ट्रैफिक लोड बढ़ रहा है। सड़कों पर अतिक्रमण इसकी सबसे बड़ी जड़ है। ट्रैफिक पुलिस की उपस्थिति शहर के हर चौराहा तिराहा पर जरूरी है। पुलिस को नियमों का पालन कराना चाहिए,चालान इसका हल नहीं है।
जगत नारायण जोशी,ट्रैफिक एक्सपर्ट
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About Pradeep Rajpoot

Pradeep Rajpoot is a social activist, businessman and editor in chief of Betwa Anchal weekly news paper.
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