दिनांक 20 January 2018 समय 6:35 AM
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गर्मी से पिघलीं राजधानी की कई सड़कें

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roadनई दिल्ली

दिल्ली में प्रचंड गर्मी का असर अब यहां की सड़कों पर भी साफ देखने को मिल रहा है। कई जगहों पर जहां खुली और चौड़ी सड़कें हैं, वहां तेज गर्मी से सड़क का कुछ हिस्सा पिघल गया है और उसकी वजह से सड़क पर बनी जेब्रा क्रॉसिंग और ब्रेकर्स का शेप भी बिगड़ गया है। इससे हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि घटिया क्वॉलिटी के बिटुमिनस के इस्तेमाल से सड़कें पिघल रही हैं। इससे बचाव का एकमात्र रास्ता यही है कि सड़क बनाते वक्त अच्छी क्वॉलिटी के डामर और बजरी का इस्तेमाल किया जाए।

भीषण गर्मी से इन दिनों विकास मार्ग, रिंग रोड, आउटर रिंग रोड, रोहतक रोड समेत कई प्रमुख बड़ी और चौड़ी सड़कों के बड़े हिस्से पिघलते जा रहे हैं। यहां तक कि कई विदेशी अखबारों में भी यह मुद्दा छाया हुआ है और दिल्ली की पिघली हुई सड़कों के फोटो भी उनमें छापे जा रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस भी चिंतित है, क्योंकि हादसों का खतरा बढ़ गया है।

सीआरआरआई के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर डॉ. सुनील बोस का मानना है कि दिल्ली में ज्यादातर सड़कें डामर और बजरी के मिक्सचर से बनाई हुई हैं। ऐसे में सड़कें ना पिघलें, इसके लिए जरूरी है कि मिक्सचर को अच्छी तरह से मिक्स किया गया हो, उसे ठीक तरह से बिछाकर उस पर अच्छी तरह से रोलिंग की गई हो और मिक्सचर बनाने में हायर ग्रेड के डामर का इस्तेमाल किया गया हो। डॉ. बोस के मुताबिक, दिल्ली समेत देशभर में आमतौर पर वीजी-30 ग्रेड का डामर इस्तेमाल किया जाता है, जिसके चलते गर्मी में सड़कें पिघल जाती हैं, जबकि विदेशों में और जिन देशों में ज्यादा गर्मी पड़ती है, वहां तेज गर्मी में सड़कें ना पिघलें, इसके लिए वीजी-40 ग्रेड का डामर इस्तेमाल किया जाता है। इन दोनों की लागत में 10 से 15 प्रतिशत तक का ही फर्क है, इसके बावजूद दिल्ली में सिविक एजेंसियां वीजी-30 ग्रेड का डामर ही यूज करती हैं। इससे तेज गर्मी पड़ने पर, खासतौर से जब तापमान 44-45 डिग्री के पार चला जाता है, तो सड़कें पिघलने लगती हैं। चूंकि इन सड़कों के ऊपर खास तरह के रोड मार्किंग पेंट से जेब्रा क्रॉसिंग और लेन पेंट की जाती हैं, ऐसे में सड़क पिघलने की वजह से उनका शेप भी बिगड़ जाता है।

डॉ. बोस ने यह भी बताया कि ज्यादातर देशों में सरकार खुद ही कॉन्ट्रैक्टरों को अच्छी क्वॉलिटी का बिटुमिन मुहैया कराती है और कॉन्ट्रैक्टर केवल लेबर और मशीनरी लगाता है, लेकिन हमारे देश में मटीरियल भी कॉन्ट्रैक्टर ही लगाता है, ऐसे में क्वॉलिटी पर असर पड़ता है। हमारे देश में एक भी नैशनल हाइवे, एक्सप्रेस वे या अन्य सड़कों पर वीजी-40 ग्रेड का बिटुमिन इस्तेमाल नहीं हुआ है। यही वजह है कि सड़कें जल्दी खराब हो जाती हैं। हालांकि अब केंद्र सरकार सड़कों की हालत सुधारने के लिए नई तकनीक और ज्यादा बेहतर मटीरियल के इस्तेमाल पर जोर दे रही है।

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About Pradeep Rajpoot

Pradeep Rajpoot is a social activist, businessman and editor in chief of Betwa Anchal weekly news paper.
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