दिनांक 18 September 2018 समय 11:34 PM
Breaking News

कराची पहुंचकर एक हफ्ते तक रुकी रही चीनी पनडुब्बी, भारत की चिंता बढ़ी

ShareGoogle+FacebookLinkedInTwitterStumbleUponEmail

chineseनई दिल्ली

अपनी पनडुब्बियों को कोलंबो तक भेजकर भारत की चिताएं बढ़ाने वाला चीन एक कदम और आगे बढ़ गया है। हिंद महासागर से आगे बढ़ते हुए अब उसने भारत के करीब अरब सागर में भी दखल बढ़ा दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक पिछले दिनों एक चीनी पनडुब्बी ने कराची में उसी तरह से डेरा जमाया, जैसा पिछले साल कोलंबो में जमाया था।

अब तक अपनी समुद्री सीमा में ही ऐक्टिव रहने वाली चीन की नेवी अब गहरे समुद्र में भी लगातार अपना दखल बढ़ा रही है। ताजा घटना में पीपल्स लिबरेशन आर्मी-नेवी की युआन क्लास 335 सबमरीन अरब सागर में भारतीय जल सीमा के करीब से होती हुई कराची पहुंची।22 मई को कराची पहुंची चीन की यह पनडुब्बी एक हफ्ते तक यहां रुकी रही और आगे बढ़ गई। यह सब ठीक उसी तरह से हुआ, जैसा पिछले साल कोलंबो में हुआ था। सितंबर 2014 में चीन की पनडुब्बी ने कोलंबो में डेरा डाला था।

भारत ने उस वक्त यह मामला श्रीलंका और चीन सरकार के सामने उठाया था। मगर चीन का कहना था कि यह सामान्य प्रक्रिया थी और अदन की खाड़ी में समुद्री डाकुओं के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में मदद के लिए भेजी गई थी। मगर यह भी सच है कि चीन अपनी न्यूक्लियर और पारंपरिक पनडुब्बियों को लंबे रूट्स पर भेजकर प्रैक्टिस कर रहा है।

चीन की पनडुब्बियों की लगातार बढ़ रही मूवमेंट पर भारत नजर बनाए हुए हैं। इंटरनैशनल वॉटर्स पर भारत का भी दखल नहीं है, इसलिए इसे लेकर ज्यादा कुछ नहीं किया जा सकता। यह पहला मौका है जब चीन की पनडुब्बी इस तरह से पाकिस्तान तक पहुंची है। वह भी उस हिस्से से गुजरकर, जिसपर भारत और चीन अपना वर्चस्व बनाने की कोशिश में जुटे हैं।

नेवी चीफ ऐडमिरल रॉबिन धवन ने हाल ही में कहा था कि नेवी लगातार चीन की मूवमेंट पर बारीक नजर रख रही है और इस बात का अंदाजा भी लगा रही है कि उससे हमें क्या खतरा पैदा हो सकता है।

युआन क्लास की पनडुब्बियां डीजल-इलेक्ट्रिक हैं और उन्हें कुछ दिनों में ऑक्सिजन और बैटरी के लिए बाहर आना पड़ता है। मगर न्यूक्लियर पनडुब्बियां कई महीनों तक पानी के नीचे रह सकती हैं।

इस्लामाबाद ने हाल ही में पेइचिंग के साथ एक डील की है, जिसके तहत ऐसी ही 8 पारंपरिक पनडुब्बियां पाकिस्तान को मिलेंगी। इनमें से 4 को पाकिस्तान में ही बनाया जाएगा। उधर भारत के पास वक्त पुरानी होती जा रही है 13 डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियां हैं। इनमें से भी आधी ही एक वक्त पर चालू रह सकती हैं। एक न्यूक्यिल वापर वाली पनडुब्बी है, मगर उसमें न्यूक्लियर मिसाइल्स नहीं हैं।

उधर चीन के पास 51 पारंपरिक और 5 न्यूक्लियर पनडुबब्बियां हैं। जल्द ही यह 5 और अडवांस्ड न्यूक्लिर पनडुब्बियां अपने बेड़े में शामिल करने जा रहा है, जिनमें 700 किलोमीटर तक मार करने वाली JL-2 मिसाइल्स लगी होंगी।

ShareGoogle+FacebookLinkedInTwitterStumbleUponEmail

comments

About Pradeep Rajpoot

Pradeep Rajpoot is a social activist, businessman and editor in chief of Betwa Anchal weekly news paper.
Scroll To Top