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दिनांक 25 April 2019 समय 12:02 AM
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एक नेता जिसने राम मंदिर के लिए सत्ता त्यागी, सजा भी काटी

War_016bअयोध्या विवाद कोई आज का विवाद नहीं हैं ये विवाद न जाने कितने दशको से चला आ रहा हैं अयोध्या मामले को लेकर ना जाने कितनी पार्टियों ने अपनी सत्ता की रोटी इस विवाद में सेकी किन्तु एक नेता ऐसा भी रहा इस देश में जिसने अपनी सत्ता की रोटी को न सेकते हुये सिर्फ राम मंदिर के लिए अपनी सत्ता त्याग दी राम मंदिर के लिए सबसे बड़ी कुर्बानी  बीजेपी  पार्टी के  नेता कल्याण सिंह ने दी. ये बीजेपी के इकलौते नेता थे, जिन्होंने  6 दिसंबर 1992 में अयोध्या में बाबरी विध्वंस के बाद अपनी सत्ता को बलि चढ़ा दिया था. राम मंदिर के लिए सत्ता ही नहीं गंवाई, बल्कि इस मामले में सजा पाने वाले वे एकमात्र शख्स भी थे . 30 अक्टूबर, 1990 को जब मुलायम सिंह यादव यूपी के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने कारसेवकों पर गोली चलवा दी थी. प्रशासन कारसेवकों के साथ सख्त रवैया अपना रहा था. ऐसे में बीजेपी ने उनका मुकाबला करने के लिए कल्याण सिंह को आगे किया. कल्याण सिंह बीजेपी में अटल बिहारी बाजपेयी के बाद दूसरे ऐसे नेता थे जिनके भाषणों को सुनने के लिए लोग बेताब रहते थे. कल्याण सिंह उग्र तेवर में बोलते थे, उनकी यही अदा लोगों को पसंद आती थी कल्याण सिंह यूपी में बीजेपी के पहले मुख्यमंत्री बने. मुख्यमंत्री बनने के ठीक बाद उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ अयोध्या का दौरा किया और राम मंदिर का निर्माण करने के लिए शपथ ली. 6 दिसंबर, 1992 को अयोध्या में कारसेवकों ने विवादित ढांचा गिरा दिया. जबकि उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय में शपथ पत्र देकर कहा था कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में, वह मस्जिद को कोई नुकसान नहीं होने देंगे. इसके बावजूद 6 दिसंबर 1992 को वही प्रशासन जो मुलायम के दौर में कारसेवकों के साथ सख्ती बरता था,  मूकदर्शक बन तमाशा देख रहा था. इसके लिए कल्याण सिंह को जिम्मेदार माना गया. कल्याण सिंह ने इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए 6 दिसंबर, 1992 को ही मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया. लेकिन दूसरे दिन केंद्र सरकार ने यूपी की बीजेपी सरकार को बर्खास्त कर दिया. बाबरी मस्जिद गिराए जाने और उसकी रक्षा न करने के लिए कल्याण सिंह को एक दिन की सजा मिली.

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About Pradeep Rajpoot

Pradeep Rajpoot is a social activist, businessman and editor in chief of Betwa Anchal weekly news paper.
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