दिनांक 16 August 2018 समय 12:30 AM
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इसी महीने में हर छह साल पर अर्धकुंभ और 12 साल पर महाकुंभ देश में अलग-अलग जगहों पर लगता है।

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Betwaanchal news

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इलाहाबाद. माघ महीने में संगम तट पर हर साल मेले का आयोजन होता है। इसमें लाखों श्रद्धालु स्नान करके पुण्य-लाभ कमाते हैं। इसी महीने में हर छह साल पर अर्धकुंभ और 12 साल पर महाकुंभ देश में अलग-अलग जगहों पर लगता है। इसमें करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु पुण्‍य लाभ की कामना से स्‍नान करते हैं। मान्यता है कि इंद्र को भी माघ स्नान से ही श्राप से मुक्ति मिली थी। आगे पढ़िए धार्मि‍क मामलों के जानकार इस बारे में क्या बताते हैं…

शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद के शिष्य राम चंद्र शुक्ल बताते हैं
– पद्मपुराण के अनुसार, भृगु देश की कल्याणी नामक ब्राह्मणी बचपन में ही विधवा हो गई थीं।
– वह विंध्याचल क्षेत्र में रेवा कपिल के सानि‍ध्‍य में तप करने लगी थीं।
– उन्‍होंने 60 माघ महीनों के दौरान स्नान किया था।
– दुर्बलता के कारण उन्‍होंने वहीं पर प्राण त्याग दिए थे।
– मृत्यु के बाद माघ स्नान के पुण्य के कारण ही उन्‍हें परम सुंदरी अप्सरा तिलोत्तमा के रूप में पुनर्जन्‍म मि‍ला।
माना जाता है सर्वश्रेष्ठ प्रायश्चित
– माना जाता है कि माघ के धार्मिक अनुष्ठान के फलस्वरूप प्रतिष्ठानपुर के नरेश पुरुरवा को अपनी कुरुपता से मुक्ति मिली थी।
– भृगु ऋषि के सुझाव पर गौतम ऋषि द्वारा अभिशप्त इंद्र को भी माघ स्नान के कारण ही श्राप से मुक्ति मिली थी।
– ऐसे में प्रायश्‍चि‍त करने के लि‍ए माघ महीने का स्नान सर्वश्रेष्ठ माना गया है।
यहीं लगता है अर्धकुंभ और महाकुंभ
– पौराणिक कथा के अनुसार, समुद्र मंथन से प्राप्त अमृत कुंभ के लिए देवताओं और असुरों में महासंग्राम हुआ था।
– देवताओं ने अमृत कलश को दैत्यों से छिपाने के लिए देवराज इंद्र को उसकी रक्षा का भार सौंप दिया।
– इस दायित्व को पूरा करने में सूर्य, चंद्र, बृहस्पति और शनि भी शामिल थे।
– दैत्यों ने उसे प्राप्त करने के लिए इंद्र के बेटे जयंत का पीछा किया।
– कलश की रक्षा के प्रयास में जयंत ने पृथ्वी पर विश्राम के क्रम में अमृत कलश को ‘मायापुरी’ (हरिद्वार), प्रयाग (इलाहाबाद), गोदावरी के तट पर नासिक और क्षिप्रा नदी के तट पर
अवंतिका (उज्जैन) में रखा था।
– परिक्रमा के क्रम में इन चारों स्थानों पर अमृत की कुछ बूंदें छलक गई थीं। इसके कारण इन तीर्थों का विशेष महत्व है।
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About Pradeep Rajpoot

Pradeep Rajpoot is a social activist, businessman and editor in chief of Betwa Anchal weekly news paper.
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