दिनांक 25 June 2018 समय 11:21 AM
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इंडिया के लैंड बिल की राह में लोकतंत्र सबसे बड़ा रोड़ा: चीन

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land-acquisition-billचीन ने भूमि अधिग्रहण बिल पर संसद में हो रहे हंगामे के लिए इंडिया में लोकतंत्र के ऊंचे स्तर को जिम्मेदार बताया है। संसद में बिल को लेकर भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाले सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच जोरदार उठापटक हो रही है। चीन का मानना है कि यह सब इंडिया में ‘बहुत ज्यादा लोकतंत्र’ होने की वजह से हो रहा है। पिछले हफ्ते चीन के शांक्सी प्रोविंस में शियान की यात्रा में इकनॉमिक टाइम्स ने देखा कि कैसे चीन ने लैंड यूज राइट्स सिस्टम को डिवेलप किया है और तेज ग्रोथ को बरकरार रखने के लिए खासतौर पर किसानों से उनकी जमीन लेने जैसे मसलों को कैसे निपटाया है।

शियान हाईटेक इंडस्ट्रीज डिवेलपमेंट जोन (XHTZ) के फॉरन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (FIPB) के प्रॉजेक्ट मैनेजर वांग मेंगहाव ने इकनॉमिक टाइम्स से बातचीत में कहा, ‘किसानों को एक डेडलाइन दी जाती है। अगर वे तब तक अपनी रजामंदी नहीं देते हैं, तो सरकार उनकी जमीन लेने की हकदार हो जाती है।’ वांग के हिसाब से इंडिया को ऐसी दिक्कत और भूमि अधिग्रहण बिल पास कराने में परेशानी इसलिए हो रही है क्योंकि वहां डेमोक्रेटिक सिस्टम है। चीन में दूसरे ऑफिसर्स और एक्सपर्ट्स का भी यही मानना है।

वांग ने कहा, ‘स्वाभाविक है कि लोग अपनी जमीन खुशी-खुशी नहीं छोड़ना चाहेंगे। चीन में जमीन सरकार की होती है और उनको लेकर लोगों के पास एक सीमा से आगे जाने का ऑप्शन नहीं होता है। सरकार जब चाहे, अपनी जमीन वापस ले सकती है, लेकिन इंडिया में सिस्टम और प्रोसेस के चलते यह जटिल मामला हो जाता है।’ चीन सरकार जिन किसानों की जमीन लेती है, उनको वह वैकल्पिक प्लॉट ऑफर करती है। उन्होंने कहा, ‘मुआवजे में पैसा और नौकरी दोनों शामिल होनी चाहिए।’लगभग 307 वर्ग किलोमीटर में फैले XHTZ को 1991 में नैशनल लेवल के शुरुआती चाइनीज साइंस पार्क के तौर पर बनाया गया था। देश के सबसे कामयाब 114 नैशनल हाईटेक जोन में एक जोन माने जाने वाले XHTZ में 2009 में एक इकनॉमिक जोन को अप्रूवल दिया गया था। यहां चीन बेंगलुरु जैसी एक सॉफ्टवेयर सिटी डिवेलप करना चाहता है। XHTZ के ऑफिसर्स ने बताया कि जब लोगों से वह एरिया खाली करने के लिए कहा जाएगा, जहां वे वर्षों से रह रहे हैं तो विरोध प्रदर्शन होंगे ही।

एक आधिकारिक सूत्र ने कहा, ‘जब सरकार को जमीन की जरूरत होती है तो आमतौर पर गांव में घोषणा के तौर पर एक साइन लगाया जाता है। गांव वालों को अगर कोई दिक्कत है तो वह उसकी शिकायत दर्ज करा सकता है। उनकी तरफ से कोई शिकायत नहीं आने पर मान लिया जाता है कि वे जमीन सरकार को देने को राजी हैं।’

इंडिया की तरह चीन में किसान इन्वेस्टर्स से सीधे डील नहीं करते। सरकार पहले ‘जनहित में’ जमीन एक्वायर करती है और फिर उसको डिवेलपर या इन्वेस्टर के हाथों बेच दिया जाता है। इसका कोई सोशल इंपैक्ट असेसमेंट भी नहीं किया जाता है।

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About Pradeep Rajpoot

Pradeep Rajpoot is a social activist, businessman and editor in chief of Betwa Anchal weekly news paper.
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