दिनांक 22 September 2018 समय 9:35 AM
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अंडर-18 ‘क्रिमिनल’ माने जा सकते हैं एडल्ट!-विधेयक पारित

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juvenileनई दिल्ली
लोकसभा ने गुरुवार को उस विधेयक को पारित कर दिया जिसके तहत गंभीर अपराध करने वाले 16 से 18 साल तक के किशोरों पर एडल्ट अपराधियों की तरह कार्रवाई करने का प्रावधान है। हालांकि सरकार ने इस बात पर जोर दिया कि बेकसूर बच्चों के साथ किसी तरह की नाइंसाफी न हो, इसका पूरा ख्याल रखा गया है।

जुवेनाइल जस्टिस (केयर ऐंड प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन) बिल के क्लॉज-7 को हटाने पर सरकार के रजामंद होने के बाद लोकसभा ने इसे पारित किया। इस प्रोविजन के तहत 16 से 18 साल के बीच गंभीर अपराध करने वाले किशोर को अगर 21 साल पूरा होने पर पकड़ा जाता तो उस पर एक एडल्ट की तरह केस चलाया जाता।

विपक्षी सांसदों ने नए कानून में उम्र सीमा बढ़ाने का ये कहते हुए विरोध किया कि इससे बच्चों के अधिकार का हनन होगा है और इन प्रावधानों का बेजा इस्तेमाल किया जा सकता है। साल 2012 में हुई दिल्ली गैंग रेप की घटना के बाद गंभीर अपराधों के मामले में किशोर अपराधियों पर सख्त कार्रवाई करने के मकसद से कानून में ये बदलाव किया जा रहा है।

नए कानून की जरूरत को वाजिब ठहराने के लिए महिला और बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने नैशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो के हवाले से कहा कि 2013 में 28,000 किशोरों ने अपराध किए जिनमें 3,887 पर गंभीर अपराधों के आरोप थे।

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About Pradeep Rajpoot

Pradeep Rajpoot is a social activist, businessman and editor in chief of Betwa Anchal weekly news paper.
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